दिनांक-15.06.2026
हरिद्वार(कमल शर्मा)लखनऊ से पधारे मुख्य अतिथि कला कुंज भारती के मुख्य सम्पादक पद्म कांत शर्मा ‘प्रभात’ की विशिष्ट सहभागिता में संस्कार भारती महानगर इकाई हरिद्वार की ओर सम्बद्ध साहित्यकारों एवं रचनाकारों की एक आत्मीय परिचय एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन सामुदायिक केंद्र, फेस-3, शिवालिक नगर में किया गया। गोष्ठी में संस्कार भारती की इकाई परिवार के साहित्यकारों अनेक गद्य एवं पद्य विधा के रचनाकारों ने अपना परिचय देने के साथ ही अपनी उत्कृष्ट काव्य रचनाओं का पाठ किया। इस दौरान सभी प्रतिभागी साहित्यकारों व कवियों ने अपनी कविता, गीत, ग़ज़ल और विविध साहित्यिक विधाओं से सजी-संवरी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को साहित्य के सौंदर्य और संवेदनाओं से अभिभूत कर दिया। गद्य विधा के लेखकों ने भी अपनी लेखन शैली की बानगियों को प्रस्तुत करते हुए अपने संस्मरण तथा गद्याशों को श्रोताओं के सम्मुख प्रस्तुत किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पद्माकांत शर्मा ने कहा कि, “साहित्य समाज की आत्मा है और सशक्त लेखनी समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनती है।” उन्होंने ‘कला कुंज भारती’ के लिए आलेख एवं रचनाएँ भेजने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए सभी साहित्य साधकों को सतत लेखन एवं सृजन के लिए प्रेरित भी किया।
अरुण कुमार पाठक द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना ‘माँ शारदे, माँ शारदे तुमको नमन स्वीकार हो, इन स्वरों की आत्मा हो, हर शब्द के तुम प्राण हो’ से प्रारम्भ हुई गोष्ठी में संस्था के प्रांतीय मंत्री राकेश मालवीय, सह-संपर्क प्रमुख अमित कुमार मीत, इकाई मंत्री संतोष साहू, आशा साहनी, मीनाक्षी चावला,, रेखा सिंघल, प्रीति, वृंदा ‘वाणी’, नीता नय्यर ‘निष्ठा’ आदि के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
चेतना पथ के संपादक अरुण कुमार पाठक की अध्यक्षता में साहित्य साधकों की यह गोष्ठी साहित्य, संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों के संवर्धन हेतु निरन्तर कार्य करने तथा आत्मीय संवाद, रचनात्मक ऊर्जा एवं सांस्कृतिक चेतना प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ सम्पन्न हुई।
संस्कार भारती की परिचय एवं काव्य गोष्ठी हुई साहित्यिक चर्चा




