विश्वशांति एवं मानव कल्याण के संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ रजत जयंती महोत्सव का भव्य महाविष्णु यज्ञ

पंचपुरी के संत-महापुरुषों के सान्निध्य में हुई पूर्णाहुति, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ


हरिद्वार (कमल शर्मा)। देवभूमि हरिद्वार की पावन तपोभूमि में भागीरथी गंगा के तट पर आयोजित श्री एकादश कुंडी होमात्मक महाविष्णु यज्ञ (रजत जयंती महोत्सव 2001-2026) का रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूर्णाहुति के साथ भव्य समापन हो गया। आत्मशांति, विश्वशांति, पर्यावरण संरक्षण एवं मानव कल्याण के उद्देश्य से आयोजित इस दिव्य महायज्ञ में देशभर से आए श्रद्धालुओं एवं संत-महात्माओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।


अधिक मास के पावन अवसर पर आयोजित इस महायज्ञ में वेदपाठ, सुंदरकांड पाठ, गंगा पूजन, यज्ञीय आहुतियां, संत प्रवचन तथा भंडारे का आयोजन किया गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर पंचपुरी के अनेक संत-महापुरुषों के आशीर्वचनों की अमृतवर्षा हुई, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।


इस अवसर पर परम पूज्य जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज (अध्यक्ष भारत माता मंदिर एवं हरिहर आश्रम, कनखल), निर्मल पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानदेव सिंह जी महाराज, श्रीमहंत संवेन्द्र पुरी जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज, स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद निहिजी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी परमात्मा देव जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि जी महाराज,

महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि जी महाराज, आचार्य डॉ. स्वामी हरिहरानंद जी महाराज, स्वामी प्रेम विवेकानंद जी महाराज तथा स्वामी हरिवल्लभ शास्त्री जी महाराज सहित अनेक संतों ने श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा, संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया।


संतों ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यज्ञ से केवल आध्यात्मिक उन्नति ही नहीं होती बल्कि पर्यावरण शुद्धि, मानसिक शांति एवं सामाजिक सद्भाव भी बढ़ता है। उन्होंने अधिक मास में किए गए धार्मिक अनुष्ठानों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह काल ईश्वर आराधना और आत्मचिंतन का सर्वोत्तम अवसर है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिदिन पतंजलि योगपीठ के योगाचार्यों द्वारा योग प्रशिक्षण भी दिया गया। श्रद्धालुओं को योग एवं स्वस्थ जीवन शैली का संदेश प्रदान किया गया। यज्ञ में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे मुख्य यजमानों एवं दानदाताओं ने भी श्रद्धापूर्वक सहभागिता की।


यज्ञ के अंतर्गत हरिद्वार स्थित श्री गुरुकृपा कुटीर के पुनर्निर्माण में विशेष योगदान देने वाले आर्किटेक्ट सेवक अरुण शर्मा (दिल्ली), जयन्ती भाई चौहान, भरत भाई पारसिया (महाराष्ट्र), नरेन्द्र भाई नाकराणी (कोलकाता), नारायण भाई भीमाणी (रायपुर), नीलेश भाई ठक्कर (लातूर), नलीन भाई ठक्कर (मुंबई), अमृतलाल पारसिया (कोलकाता), कान्तिभाई भीमाणी परिवार (रायपुर), हरेन्द्र भाई ठक्कर (अहमदाबाद) तथा रमेश भाई वासाणी (रत्नागिरि) का विशेष सम्मान किया गया।


आयोजन समिति के प्रमुख सेवकों हितेश भाई वासाणी (नांदेड़), विनोद भाई भगत (चेन्नई), छगन भाई भीमाणी (रायपुर) सहित आश्रम के समर्पित सेवाभावी भक्तों के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने कहा कि भक्तों की निष्ठा, सेवा और समर्पण के कारण ही यह भव्य धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो पाया।
समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। संपूर्ण क्षेत्र वैदिक मंत्रों, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान रहा तथा श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया।

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