ध्रुव जैसी अटल भक्ति और वामन अवतार का दिव्य संदेश सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

हरिद्वार। कनखल संन्यास रोड स्थित हरि भारती विद्यालय के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में श्रद्धालुओं ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से ओतप्रोत दिव्य प्रसंगों का श्रवण किया। कथा व्यास ने भगवान के वराह अवतार, समुद्र मंथन, वामन अवतार तथा ध्रुव चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कथा व्यास ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न अवतारों के माध्यम से धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान वराह ने पृथ्वी का उद्धार कर यह संदेश दिया कि ईश्वर अपने भक्तों और सृष्टि की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। समुद्र मंथन की कथा के माध्यम से बताया कि जीवन में अमृत प्राप्त करने के लिए संघर्ष और धैर्य आवश्यक है।
वामन अवतार का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान ने राजा बलि के अभिमान का हरण कर विनम्रता और समर्पण का आदर्श प्रस्तुत किया। वहीं ध्रुव चरित्र सुनाते हुए उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प, तपस्या और अटूट श्रद्धा से बालक ध्रुव ने वह स्थान प्राप्त किया जिसे आज संसार ध्रुव तारे के रूप में जानता है। ध्रुव की भक्ति हमें सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर के प्रति विश्वास कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
इस अवसर पर आशीर्वचन देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी कुर्शी पुरी जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला आध्यात्मिक विश्वविद्यालय है। भागवत का श्रवण मनुष्य के भीतर छिपे अहंकार, क्रोध और मोह को समाप्त कर उसे ईश्वर के समीप ले जाता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यदि ध्रुव और प्रह्लाद जैसे आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले तो समाज में नैतिकता और संस्कारों का पुनर्जागरण हो सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित सरपंच हीरा भाई ने कहा कि भागवत कथा भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। कथा के माध्यम से बच्चों और युवाओं को धर्म, संस्कार, माता-पिता के सम्मान तथा राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण कर अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण करने का आह्वान किया।
कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान के जयकारों के साथ धर्म और भक्ति के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया। आयोजन में बड़ी संख्या में भक्तगण, संत-महात्मा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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