डासना जेल में आध्यात्मिक चेतना का नवप्रभात: पूज्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी ने किया “नवग्रह वाटिका” और “गाँधी गैलरी” का लोकार्पण


गाज़ियाबाद। उत्तर प्रदेश के डासना स्थित कारागार परिसर ने गुरुवार को एक प्रेरणादायी, ऐतिहासिक और मानवतावादी पहल का साक्षी बनकर नई दिशा प्राप्त की, जब जूनापीठाधीश्वर परम पूज्य आचार्यमहामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के पावन कर-कमलों से “नवग्रह वाटिका” एवं “गाँधी गैलरी” पुस्तकालय का भव्य शुभारम्भ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन केवल औपचारिक उद्घाटन भर नहीं, बल्कि कारागार व्यवस्था को सुधार, संस्कार, आत्मजागरण और पुनर्निर्माण से जोड़ने वाली एक अभिनव पहल के रूप में उभरकर सामने आया।
अपने प्रेरणास्पद उद्बोधन में पूज्य आचार्यश्री जी ने कहा कि कारागार केवल दण्ड का स्थान नहीं, बल्कि आत्ममंथन, आत्मशुद्धि और आत्मपरिवर्तन का केन्द्र भी बन सकता है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य को ज्ञान का प्रकाश, सत्संग का स्पर्श और आध्यात्मिक दृष्टि का आलोक प्राप्त हो जाए, तो उसके भीतर सुप्त पड़ी श्रेष्ठ संभावनाएँ पुनः जागृत हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि “नवग्रह वाटिका” प्रकृति, पर्यावरण और ब्रह्माण्डीय संतुलन का प्रतीक है, जबकि “गाँधी गैलरी” सत्य, अहिंसा, करुणा, नैतिकता और आत्मानुशासन जैसे जीवन-मूल्यों की प्रेरणा देने वाला सशक्त केन्द्र बनेगी।
पूज्य आचार्यश्री जी ने महात्मा गाँधी के विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि सत्य और अहिंसा केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन को शांति, संयम और वास्तविक स्वतंत्रता की ओर ले जाने वाले शाश्वत मार्ग हैं। उन्होंने कहा कि कारागार में स्थापित यह पुस्तकालय बंदियों के लिए आत्मचिंतन, आत्मशिक्षा और आत्मोन्नति का प्रभावी माध्यम बनेगा तथा उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा।
इस अवसर पर पूज्य आचार्यश्री जी ने प्रमुख जेल अधीक्षक श्री सीताराम शर्मा, जेलर श्री के. के. दीक्षित एवं कारागार प्रशासन के इस दूरदर्शी प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे उपक्रम बंदियों के नैतिक, बौद्धिक और मानवीय उत्थान में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि “नवग्रह वाटिका” प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन का संदेश देती है, वहीं “गाँधी गैलरी” पुस्तकालय राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जीवन, संघर्ष और आदर्शों से प्रेरणा लेने का सशक्त माध्यम बनेगा।
यह आयोजन समाज के समक्ष यह सशक्त संदेश भी छोड़ गया कि प्रत्येक व्यक्ति में सुधार और पुनर्निर्माण की असीम संभावनाएँ विद्यमान हैं। उचित मार्गदर्शन, सकारात्मक वातावरण और ज्ञान का प्रकाश किसी भी जीवन को नई दिशा प्रदान कर सकता है। डासना कारागार में आरम्भ हुई यह पहल न केवल बंदियों के जीवन में परिवर्तन का माध्यम बनेगी, बल्कि समाज में करुणा, सहअस्तित्व और सुधारपरक दृष्टि को भी सुदृढ़ करेगी।
इस गरिमामय अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री अनिल गर्ग, महामण्डलेश्वर स्वामी नैसर्गिका गिरि, उद्योगपति श्री आलोक जी, श्रीमती संगीता नरूला, श्री राजीव शर्मा, श्री निपुन कथूरिया सहित अनेक गणमान्य एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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