हरिद्वार। श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा की परम पावन आचार्यपीठ, श्री हरिहर आश्रम का दिव्य प्रांगण आज आध्यात्मिक गरिमा, धर्मचेतना और ज्ञानमयी आभा से आलोकित हो उठा, जब “पुराण ज्ञान जिज्ञासु मंच” द्वारा आयोजित “पुराण प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता” के सम्मान समारोह में देशभर से जुड़े साधकों और धर्मप्रेमियों को सम्मानित किया गया।
श्रीधाम मथुरा पुरी की इस अभिनव एवं प्रेरक पहल के अंतर्गत पुराण-अध्ययन, धर्मचिंतन और आत्मोन्नति के मार्ग पर समर्पित प्रतिभागियों को स्वामी अवधेशानन्द गिरि “पूज्य आचार्यश्री” के कर-कमलों से प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान आश्रम परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, श्रद्धा और भक्ति के वातावरण से गूंज उठा।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में पूज्य आचार्यश्री ने कहा कि पुराण केवल प्राचीन कथाएं नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत आत्मा, धर्मचेतना के प्रकाश-स्तम्भ और लोकमंगल के दिव्य मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक पुराण-अध्ययन वही है, जो ज्ञान को आचरण में, श्रद्धा को साधना में और साधना को समाजोपयोगी जीवन में परिवर्तित करे।
उन्होंने आधुनिक माध्यमों से धर्म, संस्कृति और अध्यात्म के प्रसार की इस सार्थक पहल की सराहना करते हुए आयोजक मंडल, प्रतिभागी साधकों तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को मंगलाशीष प्रदान किया।
पूज्य आचार्यश्री ने आयोजन के सूत्रधार आदरणीय भगवान दत्त चतुर्वेदी, शंकर सहाय चतुर्वेदी, आनन्द बाबा, बसन्त शास्त्री चतुर्वेदी एवं डॉ. आनन्द चतुर्वेदी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सनातन धर्म की ज्ञान-परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने का श्रेष्ठ माध्यम सिद्ध होते हैं।
इसके उपरांत अपराह्न काल में आचार्यपीठ पर भगवान श्री पारदेश्वर महादेव का 1008 कमल-पुष्पों द्वारा भव्य “शिव-सहस्रार्चन” सम्पन्न हुआ। इस अलौकिक अनुष्ठान में स्वामी नैसर्गिका गिरि, स्वामी ललितानन्द गिरि सहित श्रीधाम मथुरा से पधारे साधक-बन्धुओं एवं भगिनियों ने श्रद्धा-भक्ति के साथ सहभागिता कर वातावरण को शिवमय बना
पुराण ज्ञान से आलोकित हुआ हरिहर आश्रम, 1008 कमलों से हुआ पारदेश्वर महादेव का दिव्य सहस्रार्चन



