हरिद्वार की पावन धरा पर ‘सद्भावना सम्मेलन’ का ऐतिहासिक समापन
पूज्य श्री विभु जी महाराज ने अथाह भक्त समुदाय के बीच किया अमृत वर्षा, आध्यात्मिक विचारों से अभिसिंचित हुआ जनसमूह
हरिद्वार, 15 अप्रैल
बैसाखी महोत्सव के पावन अवसर पर ऋषिकुल कॉलेज ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय ‘सद्भावना सम्मेलन’ का आज गरिमामयी समापन हुआ। आयोजन के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला, जहाँ हजारों की संख्या में आए जनसमुदाय ने आध्यात्मिक भजनों और सत्संग प्रवचनों का लाभ उठाया।

मन ही सुख-दुख का आधार:– पूज्य विभु जी महाराज
सम्मेलन के अंतिम दिवस पर पूज्य श्री विभु जी महाराज ने ‘जीवन में सुख और दुख का आधार: मन’ विषय पर सारगर्भित प्रवचन दिए। उन्होंने समझाया कि बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि हमारा मन ही हमारे सुख और शांति को निर्धारित करता है। यदि मन अनुशासित और संयमित है, तो विकट परिस्थितियों में भी शांति का अनुभव किया जा सकता है। उनके वचनों ने युवाओं और उपस्थित जनसमूह में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।
संतों की संगति ही वास्तविक तीर्थ:

श्री विभु जी ने अपने ओजस्वी विचारों से जनमानस को प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “संतों का जहाँ चलना-फिरना होता है, वह स्थान तीर्थ के समान बन जाता है। संतों की संगति हमें वह सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है जो हमारे जीवन की दिशा बदल सकती है।” उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महापुरुषों के बताए ज्ञान मार्ग पर चलना ही उनकी सच्ची पूजा और सम्मान है।

भक्तिमय वातावरण और अनुशासन की मिसाल
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों और भक्तों द्वारा प्रस्तुत किए गए मंत्रमुग्ध कर देने वाले भजनों ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया। भारी भीड़ के बावजूद, आयोजन में गजब का अनुशासन और शांति देखने को मिली, जो सम्मेलन के ‘सद्भावना’ उद्देश्य को चरितार्थ कर रही थी। दिव्य विभूतियों के दर्शन पाकर भक्तगण भाव-विभोर और आनंदित नजर आए।
आयोजक मंडल संदेश

मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी प्रेम, शांति और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाना रहा। आयोजन समिति ने सम्मेलन की अपार सफलता पर सहयोग के लिए प्रशासन का आभार व्यक्त किया। देश-विदेश से पधारे हजारों की संख्या में भक्तों को सद्भावना का संदेश जन-जन के बीच देने का आह्वान किया। अनेक स्थानों से आये संतों ने भी अपने सत्संग विचार रखें।
समापन संदेश:
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन मात्र एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, प्रेम और आपसी भाईचारे का एक सशक्त संदेश लेकर आया है। यहाँ से प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा निश्चित रूप से समाज में शांति और सौहार्द की नई अलख जगाएगी।



