हरिद्वार (कमल शर्मा)। भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध श्री तुलसी मानस मंदिर में प्रातः स्मरणीय परम पूज्य महंत श्री कामेश्वर पुरी जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा का पावन आयोजन वैदिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य पूर्णाहुति यज्ञ एवं पूजन के उपरांत संपन्न हो गया। कथा के समापन अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की अपार भीड़, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और भगवान के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
समापन दिवस पर कथा व्यास परम तपस्वी स्वामी कामेश्वर पुरी जी महाराज ने अपने दिव्य उद्बोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, भक्ति, सदाचार और ईश्वर के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाने वाली अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं तथा उसे आध्यात्मिक सुख और शांति की प्राप्ति होती है।
कथा पूर्णाहुति के अवसर पर वैदिक आचार्यों के सान्निध्य में विशाल हवन यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, राष्ट्र की उन्नति तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। यज्ञ के दौरान वातावरण “स्वाहा” एवं वैदिक मंत्रों की दिव्य ध्वनि से आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया।
इसके उपरांत भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना एवं भव्य आरती संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा कथा के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। आयोजन के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
इस अवसर पर मंदिर समिति के पदाधिकारी, संत-महात्मा, गणमान्य नागरिक एवं दूर-दूर से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। समापन समारोह ने भक्तों के हृदय में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का नया संचार कर दिया।
पूर्णाहुति यज्ञ के साथ संपन्न हुई श्रीमद्भागवत कथा, भक्ति और वैदिक मंत्रों से गुंजायमान हुआ तुलसी मानस मंदिर










