श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा कृष्ण प्रेम और धर्म का संदेश, कंस वध और रुक्मणी विवाह के दिव्य प्रसंग


हरिद्वार (कमल शर्मा)। भूपतवाला स्थित दशनाम आश्रम में श्री लटियाल माता सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। कथा के छठे दिवस पर जोधपुर (राजस्थान) से पधारी पूज्या संत तारा देवी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं का रसपान कराते हुए श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह, मथुरा प्रस्थान, कंस वध तथा महारास के दिव्य प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्ति और उल्लास से सराबोर हो उठा तथा श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयघोषों के बीच भाव-विभोर होकर कथा श्रवण करते रहे।


पूज्या संत तारा देवी जी ने कहा कि, “भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल चमत्कारों की कथा नहीं, बल्कि धर्म, प्रेम, करुणा और सत्य की स्थापना का संदेश है। कंस वध हमें अधर्म के अंत और धर्म की विजय का संदेश देता है, जबकि महारास जीवात्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। जो व्यक्ति प्रभु के प्रति समर्पण भाव रखता है, उसके जीवन में सुख, शांति और आनंद का संचार होता है।”
मुख्य यजमान एवं श्रद्धालु नवरत्न दवे ने कहा कि, “श्रीमद्भागवत कथा भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की अमूल्य धरोहर है। कथा श्रवण से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन को नई दिशा मिलती है। ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में नैतिकता और संस्कारों का प्रसार होता है।”
श्रद्धालु पूर्णा बोहरा पुत्री स्वर्गीय श्री रामचंद्र बोहरा ने कहा कि, “पूज्या संत तारा देवी जी की मधुर वाणी और सरल शैली में प्रस्तुत कथा ने प्रत्येक श्रोता के हृदय को छू लिया है। महारास और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।”
कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की झांकियों के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा में उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। श्री लटियाल माता सेवा समिति के पदाधिकारियों ने सभी भक्तों से कथा के आगामी आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का आह्वान किया।

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