दिल्ली(कमल शर्मा)सावन का पावन महीना सनातन धर्म की आस्था, श्रद्धा और भक्ति का महापर्व है। भगवान शिव की आराधना के लिए लाखों कांवड़िए धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी अटूट आस्था का परिचय दे रहे हैं। अखिल भारत हिंदू महासभा ने कांवड़ यात्रा को सनातन संस्कृति की जीवंत शक्ति बताते हुए समाज से शिवभक्तों की सेवा, सम्मान और सहयोग का आह्वान किया है।

अखिल भारत हिंदू महासभा एवं एस्ट्रोलॉजर महाकाल भैरव अखाड़ा की श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर साध्वी परम पूज्या नीरू सहगल माँ ने कहा कि सावन केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, सेवा और समर्पण की भावना को जागृत करने का अवसर है। कांवड़ लेकर आने वाला प्रत्येक शिवभक्त भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा और संकल्प लेकर यात्रा करता है। ऐसे में समाज का प्रत्येक व्यक्ति कांवड़ियों के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव रखे।
उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की सेवा स्वयं शिव सेवा के समान है। रास्ते में जल, भोजन, चिकित्सा, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना चाहिए। साथ ही कांवड़ यात्रा की पवित्रता, अनुशासन और धार्मिक मर्यादा बनाए रखना भी प्रत्येक श्रद्धालु की जिम्मेदारी है।

भारत सरकार के राज ज्योतिषी बाबा मुर्खानंद जी महाराज ने सावन और कांवड़ यात्रा के अवसर पर सनातन संस्कृति की रक्षा तथा सामाजिक एकता पर बल देते हुए कहा कि भगवान शिव की भक्ति हमें संयम, सेवा, त्याग और सद्भाव का संदेश देती है। कांवड़ यात्रा में उमड़ने वाला जनसैलाब सनातन परंपराओं के प्रति समाज की गहरी आस्था का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि धर्म तभी मजबूत होगा जब समाज संगठित होगा और समाज तभी सशक्त बनेगा जब उसमें सेवा, संस्कार और एकता की भावना होगी। उन्होंने शिवभक्त कांवड़ियों से यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखने, पर्यावरण और सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान रखने तथा आपसी भाईचारे का संदेश देने का आह्वान किया।
बाबा मुर्खानंद जी महाराज ने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। सावन और कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजन हमारी संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।










