दलित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उत्तराखण्ड टाइगर फोर्स का अनुसूचित जाति आयोग में सांकेतिक प्रदर्शन



देहरादून, 04 जुलाई। सेवला खुर्द निवासी दलित परिवार को न्याय दिलाने और थाना पटेलनगर में दर्ज एफआईआर संख्या 379/2026 में पुलिस प्रशासन द्वारा कथित ढिलाई एवं कार्रवाई में देरी के विरोध में आज उत्तराखण्ड टाइगर फोर्स (UTF) ने उत्तराखण्ड अनुसूचित जाति आयोग कार्यालय पर सांकेतिक प्रदर्शन किया।
उत्तराखण्ड टाइगर फोर्स के केंद्रीय अध्यक्ष ललित उत्तराखण्डी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन का उद्देश्य आयोग के संज्ञान में यह तथ्य लाना था कि आयोग के हस्तक्षेप के बाद मुकदमा तो दर्ज हुआ, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक न तो न्याय मिला है और न ही सुरक्षा की भावना।
UTF ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस की कार्रवाई लाचार और धीमी दिखाई दे रही है। संगठन का कहना है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दलित वर्ग को प्राप्त अधिकारों की अनदेखी करते हुए मामले को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है तथा नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी भी अब तक नहीं की गई है।
प्रदर्शन के दौरान पीड़ित दिनेश कुमार, उनके परिवार के सदस्य तथा समाज के कई लोग उपस्थित रहे। संगठन ने पूरी शालीनता और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए आयोग के सम्मान को ध्यान में रखकर अपनी बात रखी।
मौके पर आयोग के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उनके सचिव ने अध्यक्ष के निर्देशानुसार ज्ञापन प्राप्त किया। बाद में आयोग अध्यक्ष ने दूरभाष पर उत्तराखण्ड टाइगर फोर्स के केंद्रीय अध्यक्ष ललित उत्तराखण्डी से बातचीत करते हुए आश्वस्त किया कि आयोग ने प्रारंभ से ही इस प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लिया है और यदि पुलिस प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की ढिलाई बरती जा रही है तो संबंधित अधिकारियों से पुनः वार्ता कर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा जाएगा।
आयोग अध्यक्ष ने यह भी कहा कि दलित समाज का किसी भी प्रकार का उत्पीड़न किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव अथवा प्रभाव सामने आता है तो आयोग उसे गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों से बात करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और दलित वर्ग के सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
आयोग अध्यक्ष की इस पहल का स्वागत करते हुए UTF अध्यक्ष ललित उत्तराखण्डी ने कहा कि आयोग पीड़ित परिवार की पीड़ा को समझ रहा है और लगातार कार्रवाई के निर्देश दे रहा है, लेकिन देहरादून पुलिस की कार्यप्रणाली अब भी कई सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन जल्द ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करेगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे और कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
ललित उत्तराखण्डी ने कहा कि किसी भी कीमत पर यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि जिस प्रदेश के मुख्यमंत्री भू-माफियाओं और अवैध कब्जों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की बात करते हैं, उसी प्रदेश में एक दलित परिवार स्वयं को असुरक्षित महसूस करे और न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो।
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में दिए गए बयानों में यह कहा गया कि विवादित भूमि श्रम विभाग की है और मामला कानूनी विवाद से जुड़ा है, लेकिन यदि ऐसा है तो फिर संबंधित व्यक्ति को उसकी भूमि पर जाने से क्यों रोका जा रहा है और नामजद लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? यह भी जांच का विषय है।
उत्तराखण्ड टाइगर फोर्स ने मांग की है कि—
मामले में निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच हो।
कानून के अनुरूप उचित धाराओं में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सभी नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए।
पीड़ित दिनेश कुमार एवं उनके परिवार को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।
दलित समाज के अधिकारों की रक्षा करते हुए किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
संगठन ने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि दलित समाज के सम्मान, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है।
प्रदर्शन में धीरज, करण, अजय, रोहित, अमित सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे

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