हरिद्वार (कमल शर्मा)। सप्त ऋषि रोड स्थित गीता कुटीर तपोवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का रसपान किया। कथा व्यास पंडित ब्रह्मरात हरितोष एकलव्य जी ने श्रीकृष्ण के मथुरा प्रस्थान, कंस वध तथा गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, धर्म की स्थापना और लोककल्याण का अद्भुत संदेश देता है।

कथा व्यास ने कहा कि कंस वध का प्रसंग यह सिखाता है कि चाहे अधर्म और अत्याचार कितना भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। वहीं गोवर्धन लीला हमें प्रकृति, पर्यावरण और गौ संरक्षण के महत्व का बोध कराती है। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार का नाश कर समाज को यह संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा और सामूहिक एकता ही मानव जीवन की वास्तविक शक्ति है।
इस अवसर पर मुख्य यजमान श्री कैलाश चंद्र गुप्ता ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक पाठशाला है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के आदर्श हमें सत्य, सेवा, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा का मार्ग दिखाते हैं। आज के समय में युवाओं को श्रीकृष्ण के चरित्र से प्रेरणा लेकर राष्ट्र, समाज और परिवार के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

कैलाश चंद्र गुप्ता ने कहा कि गोवर्धन लीला का संदेश वर्तमान समय में और भी प्रासंगिक हो गया है, जब पर्यावरण संरक्षण वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील होकर जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए।

कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर भावविभोर हो उठे। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही तथा सभी ने कथा से प्राप्त शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।




