हरिद्वार (कमल शर्मा)। कनखल स्थित श्री महर्षि ब्रह्महरि उदासीन आश्रम, आनन्दमयी पुरम में 01 जून से 08 जून 2026 तक आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ सोमवार को संत सम्मेलन, पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हो गया। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और भक्तों ने भाग लेकर धर्म, भक्ति और सत्संग की अमृतधारा का रसपान किया।
कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित संत सम्मेलन में संतों ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, करुणा, सेवा और ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलाने का दिव्य माध्यम है। संतों ने वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए सत्संग और धर्माचरण को आवश्यक बताया।
सप्ताह भर चली कथा के दौरान भगवान के विभिन्न अवतारों, भक्तों के चरित्र, धर्म की स्थापना तथा मानव कल्याण से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे और पूरे आश्रम परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
समापन अवसर पर विशेष पूजन, हवन-यज्ञ और पूर्णाहुति के साथ विश्व कल्याण, राष्ट्र की उन्नति और मानव मात्र के सुख-समृद्धि की कामना की गई। इसके पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर श्री महन्त स्वामी दामोदर शरण जी महाराज ने सभी संतों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का संदेश जन-जन तक पहुंचाना ही इस आयोजन का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि भागवत का श्रवण व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर उसे सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
समापन समारोह में क्षेत्र के अनेक संत-महात्मा, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता पर भक्तों में विशेष उत्साह और आनंद का वातावरण देखने को मिला।
संत सम्मेलन और पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ, भक्ति रस में सराबोर हुए श्रद्धालु




