हरिद्वार (कमल शर्मा)। Bhupatwala स्थित श्री कमलदास कुटिया ट्रस्ट में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथा व्यास ऋषि प्रकाश शास्त्री ने कपिल गीता, भगवान श्रीहरि के 24 दिव्य अवतारों तथा समुद्र मंथन के पावन प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन किया। कथा के दौरान ध्रुव चरित्र और भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा, भक्ति और ईश्वर पर अटूट विश्वास ही जीवन को सफल बनाते हैं। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल “हरि बोल” के जयघोष से गुंजायमान हो गया।
कथा व्यास ऋषि प्रकाश शास्त्री ने कहा कि भगवान के प्रत्येक अवतार का उद्देश्य धर्म की स्थापना, सज्जनों की रक्षा और अधर्म का विनाश है। समुद्र मंथन का प्रसंग हमें यह संदेश देता है कि धैर्य, परिश्रम और सहयोग से ही जीवन के अमृत की प्राप्ति संभव है, जबकि कपिल गीता आत्मज्ञान, वैराग्य और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।
इस अवसर पर महंत ओम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता, संस्कार और मानवता का संदेश देने वाला महायज्ञ है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा में नियमित रूप से उपस्थित होकर अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरने का आह्वान किया।
मुख्य यजमान एवं आश्रम के ट्रस्टी shree Ajay Gautam ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा देने वाली अमूल्य धरोहर है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश प्राप्त हो रहा है। उन्होंने सभी भक्तों से कथा का अधिक से अधिक लाभ उठाने और सनातन संस्कृति के संरक्षण में अपना योगदान देने का आग्रह किया।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती में भाग लेकर विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि और जनकल्याण की मंगलकामना की। आयोजन में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कपिल गीता, भगवान के 24 अवतार और समुद्र मंथन प्रसंग से गूंजा कमलदास कुटिया, कथा श्रवण को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब









