संत समाज ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर याद किए व्याख्यान वाचस्पति श्री परमानंद जी महाराज के आदर्श


हरिद्वार/कनखल, जगजीतपुर स्थित केशव पुरम के गुर्जर भवन में व्याख्यान वाचस्पति पूज्य श्री परमानंद जी महाराज की पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर भजन-संकीर्तन, श्रद्धांजलि सभा एवं संत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें हरिद्वार के संत समाज, श्रद्धालुओं एवं गणमान्य लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर महाराज श्री को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।7


कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं भजन संकीर्तन के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने महाराज श्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।


इस अवसर पर संत समाज ने कहा कि व्याख्यान वाचस्पति श्री परमानंद जी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, संस्कृति और समाज सेवा के लिए समर्पित किया। उनके प्रवचनों से लाखों लोगों को आध्यात्मिक प्रेरणा मिली और आज भी उनके विचार समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।


श्री विनोद महाराज ने कहा कि “परमानंद जी महाराज केवल संत नहीं बल्कि सनातन संस्कृति के सशक्त प्रचारक थे। उनका जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का अनुपम उदाहरण है।”
श्री श्याम प्रकाश जी महाराज ने कहा कि “संत कभी शरीर से विदा नहीं होते, उनके विचार और संस्कार सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं। परमानंद जी महाराज की स्मृतियां सदैव भक्तों के हृदय में जीवित रहेंगी।”
श्री कल्याण देव जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि “आज समाज को ऐसे संतों के आदर्शों को आत्मसात करने की आवश्यकता है, जिन्होंने मानव सेवा को ही सच्ची साधना माना।”
श्री दुर्गा दास महाराज ने कहा कि “परमानंद जी महाराज ने सदैव प्रेम, भाईचारे और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनकी पुण्यतिथि हमें उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देती है।”
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित संतों एवं श्रद्धालुओं ने महाराज श्री के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उन्हें युगपुरुष की संज्ञा दी। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन किया गया।

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