गुरु स्मृति महोत्सव में उमड़ा संत समाज: त्याग, तपस्या और सेवा की जीवंत मिसाल थे बाबा नृसिंह दास महाराज

हरिद्वार। श्रवणनाथ नगर स्थित श्री गुरूसेवक निवास उछाली आश्रम में साकेतवासी बाबा नृसिंह दास महाराज की 21वीं पुण्यतिथि पर आयोजित गुरु स्मृति महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और संत समागम का भव्य संगम बन गया। संत समाज ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।
अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद एवं निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज ने कहा कि बाबा नृसिंह दास महाराज केवल एक संत नहीं, बल्कि संत परंपरा की दिव्य ज्योति थे। उनका जीवन त्याग, तपस्या और लोककल्याण के लिए समर्पित रहा, जो आज भी संत समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
सोनीपत के सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा नृसिंह दास महाराज ने अपने दिव्य ज्ञान से सनातन धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को नई दिशा दी। उनके विचार और शिक्षाएं सदैव समाज का मार्गदर्शन करती रहेंगी।
महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि धर्म और संत परंपराओं के संरक्षण में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर मानवता की सेवा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
कार्यक्रम के संयोजक श्रीमहंत विष्णुदास महाराज ने सभी संतों और अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके गुरुदेव का जीवन धर्म, ज्ञान और भक्ति का अद्भुत संगम था। उन्होंने संकल्प लिया कि आश्रम की सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गुरुदेव के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
अध्यक्षता कर रहे श्रीमहंत कमल नयन दास महाराज (अयोध्या) ने कहा कि बाबा नृसिंह दास महाराज त्याग और सेवा की साक्षात प्रतिमूर्ति थे, जिनका जीवन समाज के लिए एक आदर्श है।
कार्यक्रम में संतों का फूलमालाओं से भव्य स्वागत किया गया और पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा। संचालन स्वामी हरिहरानंद ने किया।
इस अवसर पर जगद्गुरु दलीप दास, स्वामी शंकर महादेव, स्वामी अनंतानंद, कथाव्यास चिन्मयानंद बापू, महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, स्वामी भगवत स्वरूप, स्वामी संतोषानंद, बाबा हठयोगी सहित अनेक संत महापुरुष, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
👉 संदेश साफ है:
महापुरुष शरीर से भले ही दूर हो जाएं, लेकिन उनके आदर्श, विचार और संस्कार सदैव समाज को दिशा देते रहते हैं। बाबा नृसिंह दास महाराज का जीवन इसी अमर सत्य का प्रतीक है।

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