ऋषिकेश/कमल शर्मा
श्री राम लक्ष्मण जानकी एवं श्री राधा बल्लभ जी के 21वें प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का पावन आयोजन श्रद्धा, भक्ति और वैदिक अनुष्ठानों के साथ भव्य रूप से सम्पन्न हो गया। सीता नवमी के पावन पर्व पर आयोजित इस दिव्य उत्सव में दूर-दूर से आए संत महात्माओं एवं श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत 17 अप्रैल 2026 से कलश स्थापना एवं श्री रामचरितमानस के नवाह्न पाठ के साथ हुई, जो प्रतिदिन विधिवत संपन्न होता रहा। प्रातःकालीन राम अर्चन हवन, सायंकालीन प्रवचन तथा भक्ति रस से ओतप्रोत कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को निरंतर धर्ममय वातावरण में जोड़े रखा।

25 अप्रैल को आयोजित श्री जानकी जन्म महोत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां माता सीता के प्राकट्य उत्सव को हर्षोल्लास एवं भक्ति भाव से मनाया गया। भजनों, कथाओं और संतों के अमृतमय प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
समापन दिवस 26 अप्रैल को संतों के ओजस्वी प्रवचनों ने धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया। इसके पश्चात आयोजित संत आराधन भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
इस पावन अवसर पर परम श्रद्धेय योगी आशुतोष ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं। उन्होंने आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे धर्म और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मनीषा अरोड़ा, श्रीमती मोनिका अरोड़ा, रामायणी गणेशदास जी महाराज (डेरावसी, पंजाब), तथा अमरकांत त्यागी सहित समस्त सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

समापन के अवसर पर बोलते हुए श्री पतराम शाह ने कहा कि श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, आस्था और धर्म के प्रति नई ऊर्जा का संचार हुआ, और यह दिव्य महोत्सव सभी के लिए अविस्मरणीय बन गया।



