हरिद्वार(कमल शर्मा) कनखल संन्यास रोड स्थित हरि भारती विद्यालय में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस श्रद्धालुओं ने भक्ति और ज्ञान की अमृतधारा का रसास्वादन किया। कथा व्यास गौ भक्त पूज्य श्री धनश्वरभाई जोशी ने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रेरणादायी प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए राजा परीक्षित के जन्म एवं श्राप, शुकदेव जी के आगमन, ज्ञान-वैराग्य-भक्ति की महिमा तथा विदुर-मैत्रेय संवाद की विस्तृत व्याख्या की।
कथा व्यास ने कहा कि राजा परीक्षित का जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि मनुष्य को प्रत्येक परिस्थिति में धर्म और ईश्वर स्मरण का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि शुकदेव जी द्वारा प्रदत्त भागवत ज्ञान आज भी मानव जीवन को मोक्ष और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाता है।
इस अवसर पर आशीर्वचन देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी खुशी पुरी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को संस्कारित करने का दिव्य माध्यम है। उन्होंने कहा कि भागवत श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति, वैराग्य और सदाचार के भाव जागृत होते हैं तथा जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः प्राप्त हो जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा के संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
राजा परीक्षित के जीवन प्रसंगों से मिली धर्म और भक्ति की प्रेरणा : कुर्शी पुरी महाराज




