श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस सृष्टि विस्तार, वाराह अवतार और कपिल मुनि के ज्ञान का हुआ भावपूर्ण वर्णन

ध्रुव की अटल भक्ति और प्रह्लाद की निष्ठा ने भाव-विभोर किए श्रद्धालु

हरिद्वार, कनखल। श्री शिव शक्ति धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा वाचिका पूज्या राधाप्रिया देवी अदिति जी ने सृष्टि की उत्पत्ति एवं विस्तार, भगवान के वाराह अवतार, कपिल मुनि के दिव्य ज्ञान तथा भक्त ध्रुव और भक्त प्रह्लाद की प्रेरणादायक कथाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि भगवान की प्रेरणा से सृष्टि का विस्तार हुआ और समस्त चराचर जगत उनकी दिव्य शक्ति का ही स्वरूप है। उन्होंने कहा कि जब पृथ्वी रसातल में चली गई थी, तब भगवान विष्णु ने वाराह अवतार धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया और अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की। यह अवतार भगवान की करुणा और सृष्टि के प्रति उनके संरक्षण भाव का प्रतीक है।
कथा वाचिका ने कपिल मुनि के ज्ञान का वर्णन करते हुए कहा कि आत्मज्ञान और भक्ति के माध्यम से मनुष्य जीवन के वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है। कपिल मुनि ने माता देवहूति को जो सांख्य ज्ञान प्रदान किया, वह आज भी मानव जीवन को दिशा देने वाला है।
उन्होंने भक्त ध्रुव की कथा सुनाते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, तपस्या और भगवान के प्रति अटूट विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। बालक ध्रुव ने कठिन तप कर भगवान की कृपा प्राप्त की और ध्रुव तारे के रूप में अमर हो गए। उनकी कथा बच्चों और युवाओं को लक्ष्य के प्रति समर्पण तथा भक्ति का संदेश देती है।
कथा के दौरान भक्त प्रह्लाद के प्रसंग का वर्णन करते हुए राधाप्रिया देवी अदिति जी ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिसने भगवान का नाम नहीं छोड़ा, वही सच्चा भक्त कहलाता है। प्रह्लाद की अटूट भक्ति और भगवान नृसिंह के प्राकट्य की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं।
कथा के समापन पर भजन-कीर्तन एवं आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरा कथा पंडाल भगवान के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा तथा श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

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