भवसागर की वैतरणी है श्रीमद् भागवत कथा- युवराज स्वामी दामोदराचार्य
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित आचार्य बेला इंडिया टेंपल में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अवसर पर भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु और संतगण उपस्थित रहे। भागवत कथा के पहले दिन श्रद्धालु भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए कथा व्यास युवराज स्वामी दामोदराचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा भवसागर की वैतरणी है जो व्यक्ति के मन से मृत्यु का भय मिटाकर उसके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी और कलयुग में आज भी इसके साक्षात प्रमाण देखने को मिलते हैं। वास्तव में श्रीमद् भागवत देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। जो श्रद्धालु भक्त श्रद्धा पूर्वक भागवत कथा का श्रवण करता है उसका जीवन भवसागर से पार हो जाता है।

श्रीमद् भागवत महापुराण सनातन धर्म का सबसे पवित्र और महान ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अलौकिक वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ केवल एक कथा नहीं, बल्कि मोक्ष, ज्ञान और भक्ति रस का अपूर्व भंडार है।इसका नियमित पाठ या श्रवण करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट होते हैं और भगवान श्री कृष्ण के चरणों में अनन्य प्रेम प्राप्त होता है। जगद्गुरु रामानुजाचार्य आचार्य स्वामी श्याम नारायणाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मां गंगा की भांति बहने वाली ज्ञान की अविरल धारा है जिसे जितना ग्रहण करो उतनी ही जिज्ञासा बढ़ती है और प्रत्येक सत्संग से अतिरिक्त ज्ञान की प्राप्ति होती है। कथा के मुख्य यजमान उमाकांत पटसारिया इंदौर वालों ने कथा में पधारे सभी संत महापुरुषों का फूलमाला पहनकर स्वागत किया। इस अवसर पर अनिल राजोरिया, नरेश चौहान, रामतीर्थ तिवारी, कल्पना पटसारिया, शिवम महंत, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, महंत सुतीक्ष्ण मुनि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।













