हरिद्वार। प्रेस क्लब सभागार में आयोजित उत्तराखंड विधि कांग्रेस के अधिवक्ता सम्मेलन में अधिवक्ताओं ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के समक्ष अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने, नए अधिवक्ताओं को पांच वर्ष तक प्रतिमाह पांच हजार रुपये स्टाइपेंड देने, 10 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज एवं बीमा सहित अन्य मांगें प्रमुखता से रखीं।

प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष एड. उमेश जोशी और जिलाध्यक्ष एड. राकेश राजपूत ने कहा कि अधिवक्ताओं के सामने अनेक गंभीर समस्याएं हैं। इन समस्याओं से शासन-प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि महंगाई के दौर में नए अधिवक्ताओं के लिए शुरुआती वर्षों में आर्थिक कठिनाइयां सबसे बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में पांच वर्ष तक पांच हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलने से उन्हें काफी राहत मिल सकती है। साथ ही अधिवक्ताओं के लिए कैशलेस चिकित्सा और बीमा की सुविधा भी जरूरी है।

पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि अधिवक्ता समाज न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है और लोकतंत्र में अधिवक्ताओं की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर अधिवक्ताओं की समस्याओं और उनकी पांच सूत्रीय मांगों को गंभीरता से लेकर समाधान की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां अधिवक्ताओं की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं।

उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज प्रदेश में वकील, किसान, शिक्षक, मजदूर, छात्र और व्यापारी सहित विभिन्न वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। उन्होंने अंकिता भंडारी मामले का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय मिलने का सवाल बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी स्वयं अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। हरक सिंह रावत ने कहा कि 2027 में प्रदेश की सत्ता में बदलाव होगा और कांग्रेस मजबूती के साथ जनता के मुद्दों को लेकर आगे बढ़ेगी।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता आलोक शर्मा ने कहा कि अधिवक्ता समाज हमेशा से समाज और लोकतंत्र की आवाज को मजबूती देने का काम करता आया है। उन्होंने कहा कि वकीलों की जायज मांगों को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए और अधिवक्ता सुरक्षा कानून समेत सभी मांगों पर ठोस निर्णय होना चाहिए।
तेलूराम प्रधान ने कहा कि अधिवक्ताओं को न्याय व्यवस्था का मजबूत स्तंभ माना जाता है, इसलिए उनकी सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि नए अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलने से उन्हें अपने पेशे में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा।

मनोज धनगर ने कहा कि अधिवक्ताओं की पांच सूत्रीय मांगें लंबे समय से उठाई जा रही हैं। सरकार को अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान करने के लिए सकारात्मक पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।

सम्मेलन में सोम त्यागी, मनोज सैनी, विवेक जागरिया, कोषाध्यक्ष हेमंत राय, उपाध्यक्ष एड. गुरमीत सिंह, एड. प्रदीप जगता, एड. कविता वैभव, एड. राकेश चौहान, एड. जिशान मलिक, एड. मीनाक्षी वर्मा, एड. विमल कुमार, एड. दीक्षित सिंह राठौर, एड. फुरकान अली, एड. गगन भाटिया, एड. मेहताब अली, एड. रोहित कुमार, एड. संतोष चंद्रा, एड. सतेंद्र कुमार, एड. फैजल अंसारी, एड. इमरान, एड. कुलदीप कुमार, एड. प्रीति कश्यप, एड. संगीता भारद्वाज, एड. पूजा राजपूत, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमन गर्ग, पूर्व राज्यमंत्री डॉ. संजय पालीवाल, किरणपाल बाल्मीकि, संतोष चौहान, पूनम भगत, अशोक शर्मा, पार्षद सुनील कुमार, वसीम सलमानी, विकास चंद्रा, सागर बेनीवाल सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।













