गुरु परंपरा की अलख जगाएंगे स्वामी सूर्यदेव, हरिद्वार से वृजघाट और जींद तक होंगे भव्य धार्मिक आयोजन


हरिद्वार (कमल शर्मा)। भूपतवाला स्थित रानी गली नंबर-4 में श्री सत्य सूर्य निकेतन ट्रस्ट द्वारा परम पूज्य, प्रातः स्मरणीय, परम विरक्त शिरोमणि श्री 108 स्वामी सत्यदेव महाराज जी की पावन स्मृति में 37वें महोत्सव एवं गुरुदेव की मूर्ति स्थापना के 16वें वर्ष के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। व्याकरण वेदान्ताचार्य स्वामी सूर्यदेव जी के सान्निध्य में संत-महामंडलेश्वरों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में आचार्य गरीबदास जी की वाणी के अखंड पाठ, हवन-यज्ञ, श्रद्धांजलि सभा एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
श्रद्धांजलि समारोह में वक्ताओं ने स्वामी सत्यदेव महाराज जी के त्याग, तपस्या और लोककल्याणकारी जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने आध्यात्मिक साधना और मानव सेवा के माध्यम से समाज को नई दिशा प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
इसी क्रम में व्याकरण वेदान्ताचार्य स्वामी सूर्यदेव जी ने वर्ष भर आयोजित होने वाले आगामी धार्मिक आयोजनों की जानकारी देते हुए बताया कि गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत 28 जुलाई 2026, मंगलवार को श्रीरामचरितमानस पाठ का शुभारंभ किया जाएगा तथा 29 जुलाई, बुधवार को प्रातः 10 बजे पाठ का भोग, गुरु पूजन एवं विशाल भंडारे का आयोजन होगा।
वहीं कार्तिक पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन 22 से 24 नवंबर 2026 तक श्री सत्य सूर्य निकेतन, मोदी भवन के सामने वाली गली, गली नंबर-2, वृजघाट, जनपद हापुड़ (उत्तर प्रदेश) में किया जाएगा। 22 नवंबर को गरीबदासीय ग्रंथ साहिब का प्रकाश, 23 नवंबर को मध्य का भोग तथा 24 नवंबर को हवन, संपूर्ण भोग एवं संत-महापुरुषों तथा श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन होगा।
इसके अतिरिक्त स्वामी सत्यदेव महाराज जी की 38वीं पुण्यतिथि (बरसी महोत्सव) 1 से 3 अप्रैल 2027 तक मलूकदास का डेरा, ग्राम नंगूरा, जिला जींद (हरियाणा) में आयोजित की जाएगी। तीन दिवसीय कार्यक्रम में गरीबदासीय ग्रंथ साहिब का पाठ, मध्य का भोग, हवन तथा संत-महापुरुषों एवं भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
स्वामी सूर्यदेव जी ने सभी श्रद्धालुओं एवं भक्तों से इन पावन आयोजनों में सम्मिलित होकर गुरु परंपरा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा पुण्य लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया।

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