“श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर उमड़ा आस्था का सागर, श्रीकृष्ण भक्ति में सराबोर हुए श्रद्धालु”

हरिद्वार (कमल शर्मा)। कनखल स्थित श्री हरी भारती संस्कृत महाविद्यालय, गंगा तट पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में समापन हो गया। कथा के अंतिम दिवस में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, धर्म, भक्ति और सदाचार के संदेशों का श्रवण किया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन, आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।


कथा वाचक गौभक्त पूज्य श्री धनेश्वरभाई जोशी ने भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को संस्कारित और आध्यात्मिक दिशा प्रदान करने वाला दिव्य ज्ञानयज्ञ है। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण और सत्संग ही कलियुग में मानव कल्याण का सबसे सरल मार्ग है।


इस अवसर पर महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री कुर्शी पुरी जी महाराज ने कहा कि “श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को धर्म, प्रेम, करुणा और सेवा का मार्ग दिखाती है। कथा श्रवण से मन की अशांति दूर होती है तथा व्यक्ति भगवान की शरण में जाकर आत्मिक सुख प्राप्त करता है। आज समाज को भौतिकता से ऊपर उठकर आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है।”


महामण्डलेश्वर श्री शुभम गिरी महाराज ने कहा कि “भागवत कथा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है। कथा के माध्यम से नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार और राष्ट्रहित की प्रेरणा मिलती है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।”


श्री महंत गंगा गिरी महाराज ने कहा कि “गंगा तट पर आयोजित भागवत कथा का विशेष महत्व है। जहां गंगा, संत और भगवान की कथा का संगम हो, वहां आध्यात्मिक चेतना स्वतः जागृत होती है। श्रद्धालुओं का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति निरंतर मजबूत हो रही है।”


वहीं सरपंच श्री हीरा भाई ने आयोजन की सफलता पर सभी श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं एवं सेवकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “भागवत कथा ने समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है। धर्म और संस्कृति के ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।”


समापन अवसर पर संत-महात्माओं का सम्मान किया गया तथा आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कथा समाप्ति के बाद महाआरती और भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ आयोजन को यादगार और सफल बताया।

इस अवसर पर, महामंडलेश्वर कुर्शीपुरी जी महाराज, महामंडलेश्वर शुभम गिरी महाराज, श्री महंत गंगा गिरी महाराज, सरपंच हीराभाई, भरतभाई राजपूत, भीमासर गुजरात कच्छ, नरेस दवे जमडा वाव थराद आदि उपस्थित रहे l

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