हरिद्वार (कमल शर्मा)। चंडीघाट स्थित श्री सिद्धबली हनुमान मंदिर में साकेतवासी प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्री महंत सेवादास जी महाराज का 42वां स्मृति महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और संत परंपरा की गरिमा के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर संत-महापुरुषों का विशाल समागम हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए उनके बताए आध्यात्मिक एवं सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम ज्ञान, वैराग्य और त्याग की प्रतिमूर्ति साध्वी महंत गंगा दास जी महाराज तथा प्राचीन सिद्धबली मंदिर, जोहना घाट, सराहा, हिमाचल प्रदेश के परम पूज्य महंत परमेश्वर दास जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित हुआ। जगतगुरु रामानंदाचार्य श्री अयोध्या दास जी महाराज एवं प्रातः स्मरणीय बाबा हठयोगी जी महाराज की कृपा से संत-महापुरुषों ने श्री महंत सेवादास जी महाराज के तप, त्याग, सेवा और धर्मनिष्ठ जीवन का भावपूर्ण स्मरण किया।
इस अवसर पर महंत गंगा दास जी महाराज ने कहा कि सच्चे संत कभी संसार से विदा नहीं होते। उनके विचार, संस्कार और सेवा की परंपरा सदैव समाज को प्रकाश प्रदान करती रहती है। श्री महंत सेवादास जी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, अध्यात्म, संत सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए त्याग, तपस्या और भक्ति की प्रेरणा है। स्मृति महोत्सव का उद्देश्य केवल संत का स्मरण करना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारना भी है।
महंत परमेश्वर दास जी महाराज ने कहा कि गुरु और संत की कृपा मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। संतों के चरणों में बैठकर प्राप्त ज्ञान मनुष्य के भीतर के अज्ञान और विकारों को दूर कर उसे सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि श्री महंत सेवादास जी महाराज जैसे संत समाज की अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर होते हैं, जिनकी तपस्या और सेवा आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती है।
कार्यक्रम के प्रबंधक एवं अधिकारी श्री धीरज दास जी ने संत-महापुरुषों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री महंत सेवादास जी महाराज की पावन स्मृति में आयोजित यह महोत्सव संत परंपरा, गुरु भक्ति और सेवा भावना का प्रतीक है। संतों का आशीर्वाद ही आश्रम और समाज की सबसे बड़ी शक्ति है।
स्मृति महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। संत-महापुरुषों ने श्री महंत सेवादास जी महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके आध्यात्मिक एवं सामाजिक योगदान को याद किया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
समापन अवसर पर संत-महापुरुषों के पावन सानिध्य में विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरा आयोजन गुरु भक्ति, संत सेवा और आध्यात्मिक श्रद्धा से ओत-प्रोत रहा।
इस अवसर पर श्री महंत सूरज दास महाराज, महंत हरिदास महाराज, महंत रघुवीर दास महाराज, महंत दिनेश दास महाराज, महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज, महंत बिहारी शरण महाराज, स्वामी अंकित शरण महाराज, महंत तूफान गिरी महाराज, स्वामी धीरज दास महाराज, महंत दुर्गादास महाराज, महंत प्रहलाद दास महाराज, महंत शत्रुघ्न दास महाराज, ट्रस्टी श्री अर्जुन सैनी, श्री अभिषेक शर्मा, जगदीश तोमर, राजेश भाटिया, उज्ज्वल नारंग, श्री दमन, श्री बबल, श्री चंचल गेरा, श्री पवन गुप्ता, श्री हरि सिंह, श्री मीना रावत, श्री सतीश रावत, विशाल शर्मा, स्वामी सरयू दास सहित बड़ी संख्या में संत-महापुरुष एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
संत परंपरा और गुरु भक्ति का अनुपम संदेश बना श्री महंत सेवादास जी महाराज का 42वां स्मृति महोत्सव













