उदयपुर(कमल शर्मा)कृष्णा सेवा संस्थान, उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित खाटू श्याम कथा एवं खाटू श्याम सुधा ज्ञान परीक्षा का आज भावपूर्ण समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस श्रद्धा, ज्ञान और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

खाटू श्याम सुधा ज्ञान परीक्षा में दिनेश चंद्र गरियावास ने 76 अंकों के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया। पूजा मोची 72 अंकों के साथ द्वितीय तथा मीता गोस्वामी 68 अंकों के साथ तृतीय स्थान पर रहीं। विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर उनके ज्ञान, जिज्ञासा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण की सराहना की गई।
इस अवसर पर पूज्य कृष्णा संजय जी महाराज, मोहन गोकुलधाम पीठाधीश्वर, हरिद्वार ने कहा कि आज आवश्यकता केवल कथा सुनने की नहीं, बल्कि सनातन को जानने, समझने और अपने जीवन में उतारने की है। गुरुदेव ने कहा कि वे कथा और आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सनातन चेतना जगाने तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

महाराज श्री ने कहा कि ज्ञान के बिना भक्ति अधूरी है और आचरण के बिना ज्ञान अधूरा है। इसलिए खाटू श्याम सुधा ज्ञान परीक्षा जैसे प्रयास समाज में धार्मिक जागृति के साथ-साथ बच्चों और युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव का भाव पैदा करने वाले हैं।
पिछले दिनों चली खाटू श्याम कथा में महाराज श्री ने वीर बर्बरीक से लेकर खाटू श्याम बाबा की महिमा और कलियुग में श्याम नाम की महत्ता तक का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि उदयपुर की जनता के बीच कथा की गहरी छाप छोड़ गई। कथा के प्रत्येक दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और भक्ति, ज्ञान एवं श्याम नाम में डूबे रहे।

कथा के समापन अवसर पर महाराज श्री ने उदयपुरवासियों के प्रेम और स्नेह को भावुक होकर स्वीकार करते हुए कहा—
“मिलन आज तक था हमारा, रही जिंदगी तो मिलेंगे दोबारा।”
महाराज श्री के इन शब्दों ने पूरे वातावरण को भावुक कर दिया। श्रद्धालुओं की आंखों में अपनापन और मन में पुनः दर्शन की प्रतीक्षा साफ दिखाई दी। उदयपुरवासियों ने महाराज श्री को प्रेमपूर्वक विदाई दी और कथा की स्मृतियां लंबे समय तक अपने हृदय में संजोए रखने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान आचार्य शिवम ढौंडियाल जी द्वारा यज्ञ सम्पन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर सुख, शांति और सनातन संस्कृति की उन्नति की कामना की।
कार्यक्रम के उपरांत श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे की सेवा कालू लाल जी द्वारा की गई, जिसके लिए आयोजन समिति ने उनका आभार व्यक्त किया।

खाटू श्याम सुधा ज्ञान परीक्षा और कथा के समापन ने उदयपुर में यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि जब कथा के साथ ज्ञान जुड़ता है, ज्ञान के साथ संस्कार जुड़ते हैं और संस्कार के साथ भक्ति जुड़ती है, तब सनातन केवल सुना नहीं जाता—जीवन में उतारा जाता है।
“हारे का सहारा—बाबा श्याम हमारा।”
कृष्णा सेवा संस्थान, उदयपुर
खाटू श्याम सुधा ज्ञान परीक्षा एवं कथा आयोजन समिति










