हरिद्वार (कमल शर्मा)। आज चल रहे पितृपक्ष के विषय में बताते हुए कथा व्यास श्री श्री सुधा दीदी ने श्रद्धालुओं को पितृपक्ष के आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का पर्व है। इन दिनों विधि-विधान से पितरों का तर्पण, श्राद्ध एवं श्रद्धापूर्वक स्मरण करने की परंपरा सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखती है।
श्री श्री सुधा दीदी ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में माता-पिता एवं पूर्वजों के योगदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। पितृपक्ष हमें अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए तर्पण एवं सेवा कार्यों के माध्यम से व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करता है।
उन्होंने कहा कि पितरों का स्मरण केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने परिवार, संस्कार और परंपराओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि पितृपक्ष के दौरान जरूरतमंदों की सेवा, गौसेवा, अन्नदान और धार्मिक कार्यों में सहभागिता करें तथा अपने जीवन में सदाचार एवं संस्कारों को अपनाएं।
कथा व्यास ने कहा कि सनातन धर्म में सेवा, श्रद्धा और संस्कार को जीवन का आधार माना गया है। पूर्वजों का आशीर्वाद परिवार के लिए सदैव प्रेरणा और शक्ति का स्रोत माना जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने बच्चों को भी भारतीय संस्कृति, परंपराओं और पितृ सम्मान के संस्कार देने का आह्वान किया।
पितृपक्ष में पूर्वजों के स्मरण और तर्पण का विशेष महत्व: कथा व्यास श्री श्री सुधा दीदी













