संविदा श्रमिक के बेटे ने रचा सफलता का इतिहास, संविदा श्रमिक के बेटे प्रशांत ने NEET-2026 में पाई सफलता, अब बनेगा डॉक्टर



भेल में कार्यरत खूब सिंह के बेटे को वाराणसी के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में मिला एमबीबीएस में प्रवेश, संघर्ष और मेहनत से साकार किया परिवार का सपना


हरिद्वार (कमल शर्मा)। कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों और लक्ष्य के प्रति सच्ची लगन हो, तो आर्थिक अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। इस कहावत को सच कर दिखाया है भेल, हरिद्वार में संविदा श्रमिक के पद पर कार्यरत खूब सिंह के पुत्र प्रशांत कुमार ने। प्रशांत ने नीट-2026 की परीक्षा में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार का सपना साकार किया है, बल्कि अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से दूसरे विद्यार्थियों के सामने भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्हें ऑल इंडिया प्रथम चरण की काउंसलिंग में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, वाराणसी, उत्तर प्रदेश में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश मिला है।
आर्थिक चुनौतियों के बीच नहीं डिगा हौसला
मूल रूप से ग्राम तिगरी मनकावाला, नगीना, बिजनौर के निवासी खूब सिंह वर्तमान में वाटर वर्क्स कॉलोनी, शिवलोक, हरिद्वार में अपने परिवार के साथ रहते हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। प्रशांत बचपन से ही होनहार और मेधावी विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शिक्षा मंदिर, तरुण हिमालय कॉलेज, शिवलोक, हरिद्वार से प्राप्त की। बचपन से ही चिकित्सक बनने का सपना देखने वाले प्रशांत ने अपनी मेहनत और लगन से इस लक्ष्य की ओर लगातार कदम बढ़ाए।
डॉ. अंबेडकर शिक्षा सहभागिता कार्यक्रम ने दिखाई राह
प्रशांत की सफलता में शिक्षा के प्रति समर्पण के साथ-साथ सामाजिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने बीएचईएल अनुसूचित जाति इम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (पंजीकरण संख्या 1075) द्वारा निर्धन परिवारों के बच्चों के लिए निःशुल्क संचालित डॉ. भीमराव अंबेडकर शिक्षा सहभागिता कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित होकर जवाहर नवोदय विद्यालय, रोशनाबाद से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की।
प्रशांत की माता संगीता गौतम ने बताया कि आर्थिक अभाव के बावजूद उनके बेटे ने नीट प्रवेश परीक्षा की तैयारी स्वयं की। कठिन परिस्थितियों में भी उसने पढ़ाई के प्रति अपनी एकाग्रता बनाए रखी और निरंतर मेहनत के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।
डॉ. भीमराव अंबेडकर को मानते हैं आदर्श
भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर को अपना आदर्श मानने वाले प्रशांत कुमार का कहना है कि शिक्षा और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया।
प्रशांत का लक्ष्य अनुशासन और समर्पण के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर एक कुशल चिकित्सक बनना है। वह भविष्य में चिकित्सा के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहते हैं। उनकी यह उपलब्धि उन विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं।
प्रशांत की सफलता पर बधाइयों का लगा तांता
प्रशांत कुमार की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई देने वालों में प्रशासनिक अधिकारी शिव लाल गौतम, डॉ. शुभम गौतम, प्रतीक्षा, शगुन, अश्विनी देवी, वरिष्ठ अभियंता बृजेश कुमार, अपर अभियंता चंद्रकांत सिंह, सहायक अभियंता सुबोध कुमार, अपर अभियंता मनोज कुमार, अपर अभियंता अंकुर मालिया, कृष्ण कुमार, संगीता गिरी, मनोज शुक्ला, इमरान शाह, मांगे राम, बाबू भाई, तिवारी एवं कपिल सहित अनेक लोग शामिल रहे।
सभी ने प्रशांत और उनके परिवार को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। लोगों ने विश्वास जताया कि प्रशांत भविष्य में एक कुशल चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करेंगे और अपनी सफलता से अन्य युवाओं को भी शिक्षा, परिश्रम और आत्मविश्वास के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे।
प्रशांत की सफलता का संदेश स्पष्ट है—मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है और जिनके इरादों में उड़ान होती है

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