जन्म जयंती पर भगतसिंह के क्रांतिकारी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान
हरिद्वार। शहीद-ए-आजम भगतसिंह की जयंती के अवसर पर विभिन्न सामाजिक एवं युवा संगठनों द्वारा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भगतसिंह केवल एक महान क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी चिंतक, लेखक और युवाओं के प्रेरणास्रोत भी थे, जिनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 28 सितम्बर 1907 को पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले के बंगा गांव (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे भगतसिंह का पूरा परिवार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा हुआ था। जलियांवाला बाग हत्याकांड और देश की तत्कालीन परिस्थितियों ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला, जिसके बाद उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। 23 मार्च 1931 को मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने साथियों राजगुरु और सुखदेव के साथ हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमकर राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
इस अवसर पर युवा समाजसेवी अंकित चौधरी ने कहा कि शहीद भगतसिंह के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता आंदोलन के समय थे। उन्होंने कहा कि भगतसिंह ने युवाओं को केवल संघर्ष का ही नहीं, बल्कि अध्ययन, जागरूकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया था। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक समानता, राष्ट्रीय एकता और जनहित के मुद्दों पर युवाओं को सजग रहने का आह्वान किया।
अंकित चौधरी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा वर्ग भगतसिंह के जीवन से प्रेरणा लेकर देश और समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि शहीद भगतसिंह का सपना एक जागरूक, शिक्षित और समतामूलक समाज का था तथा उनके विचार नई पीढ़ी के लिए सदैव मार्गदर्शक बने रहेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने शहीद-ए-आजम भगतसिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया और “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों के साथ उन्हें नमन













