हरिद्वार (कमल शर्मा)। श्यामपुर कांगड़ी स्थित गुरु कृपा ही परम कल्याणः काष्णि भक्ति धाम-गुरुकुलम् में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी अमृतानंद जी महाराज के दिव्य सानिध्य में आयोजित व्यास पूजा एवं गुरु पूर्णिमा समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर व्यासपीठ से अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में स्वामी अमृतानंद जी महाराज ने कहा कि “गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शिष्य के हृदय में गुरु के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और समर्पण का दिव्य उत्सव है। ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का अर्थ प्रकाश है। जो मनुष्य के जीवन से अज्ञान, भय और संशय को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाए, वही सच्चा गुरु है।”
उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास भारतीय संस्कृति के ज्ञान-परंपरा के महान स्तंभ हैं। व्यास पूजा का वास्तविक उद्देश्य उनके आदर्शों, विचारों और संस्कारों को अपने जीवन में उतारना है। जब तक शिष्य के भीतर निष्काम सेवा, अटूट श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का भाव नहीं होगा, तब तक आत्मज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है।
महाराज श्री के ओजस्वी एवं भक्तिरस से परिपूर्ण प्रवचनों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। श्रद्धालु ज्ञानामृत का पान कर भाव-विभोर हो गए और पूरा परिसर “गुरुदेव भगवान की जय” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
स्वामी अमृतानंद जी महाराज ने कहा कि काष्णि भक्ति धाम-गुरुकुलम् केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आधुनिक शिक्षा और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त केंद्र बन चुका है। यहां विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त शिक्षा के साथ राष्ट्रभक्ति, सेवा और अध्यात्म के मूल्यों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे समाज और राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य तैयार हो सके।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने विधिवत व्यास पूजा, गुरु पूजन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में संत-महात्माओं, गणमान्य नागरिकों एवं बड़ी संख्या में भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और गुरु महिमा के दिव्य भाव से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
“गुरु ही अज्ञान से ज्ञान तक का सेतु हैं” — स्वामी अमृतानंद जी महाराज, गुरु पूर्णिमा पर काष्णि भक्ति धाम में उमड़ा श्रद्धा का महासागर










