भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया सरल बनाने की मांग, इंजीनियर्स-आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन ने विकास प्राधिकरण को सौंपे सुझाव



हरिद्वार/रुड़की(कमल शर्मा)भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने, अनावश्यक आपत्तियों पर रोक लगाने और प्रक्रिया को पारदर्शी, तकनीकी रूप से सुदृढ़ एवं समयबद्ध बनाने की मांग को लेकर हरिद्वार-रुड़की इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन ने हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव को विस्तृत सुझाव सौंपे हैं। एसोसिएशन ने मांग की है कि भवन मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल, मानकीकृत और अधिकतम डिजिटल बनाया जाए, जिससे आम आवेदकों के साथ-साथ आर्किटेक्ट, इंजीनियर और ड्राफ्ट्समैन को भी अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।


एसोसिएशन के अध्यक्ष इंजीनियर विनय कुमार ने कहा कि भवन मानचित्र स्वीकृति का उद्देश्य निर्माण कार्यों को नियमों के अनुरूप सुनिश्चित करना है, लेकिन प्रक्रिया के दौरान बार-बार अलग-अलग आपत्तियां लगने से आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि यदि एक ही बार में सभी कमियां स्पष्ट कर दी जाएं और तकनीकी आपत्तियों को नियमों के आधार पर स्पष्ट किया जाए तो मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया काफी तेज और पारदर्शी हो सकती है।


सचिव इंजीनियर मोहित राणा ने बताया कि एसोसिएशन ने विकास प्राधिकरण के समक्ष 13 प्रमुख बिंदुओं पर सुझाव रखे हैं। इनमें स्वामित्व एवं संपत्ति दस्तावेजों के सत्यापन, सभी आपत्तियों को एक साथ उठाने, साइट कोऑर्डिनेट में मामूली अंतर के लिए निर्धारित सहनशीलता, गूगल मैप एवं सैटेलाइट इमेज के व्यावहारिक उपयोग, पूर्व स्वीकृत मानचित्रों का केंद्रीकृत डिजिटल डाटाबेस, अवैध प्लॉटिंग संबंधी आपत्तियों के लिए स्पष्ट प्रक्रिया, एनओसी प्रक्रिया के डिजिटलीकरण और प्री-सबमिशन चेकलिस्ट जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।


एसोसिएशन ने विशेष रूप से सुझाव दिया है कि यदि आवेदक के पास वैध सेल डीड, म्यूटेशन तथा नगर पालिका के प्रॉपर्टी असेसमेंट दस्तावेज उपलब्ध हैं तो उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर स्वामित्व एवं संपत्ति संबंधी तथ्यों का सत्यापन किया जाए। जहां म्यूटेशन अथवा नगर पालिका असेसमेंट उपलब्ध हो, वहां उन्हीं तथ्यों को साबित करने के लिए अनावश्यक अतिरिक्त दस्तावेज या अलग से तहसील एनओसी की मांग न की जाए, जब तक कि संबंधित नियमों के तहत उसकी वास्तविक आवश्यकता न हो।


एसोसिएशन ने यह भी कहा कि आवासीय भवनों की फाइलों की जांच के दौरान सभी कमियां और आपत्तियां एक ही चरण में स्पष्ट की जानी चाहिए। अलग-अलग चरणों में नई-नई आपत्तियां लगाने से फाइलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होती है।
साइट निरीक्षण के दौरान दर्ज किए जाने वाले जीपीएस कोऑर्डिनेट को लेकर भी एसोसिएशन ने व्यावहारिक व्यवस्था बनाने की मांग की है। प्रतिनिधियों का कहना है कि साइट निरीक्षण, फोटोग्राफ और संपत्ति दस्तावेजों में दर्ज कोऑर्डिनेट में मामूली अंतर होना स्वाभाविक है। लगभग पांच मीटर तक के अंतर के मामलों में स्पष्ट तकनीकी मानक या सत्यापन प्रक्रिया निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि मामूली जीपीएस अंतर के कारण वास्तविक आवेदनों पर आपत्ति न लगे।


एसोसिएशन ने गूगल मैप एवं सैटेलाइट इमेज के आधार पर लगाई जाने वाली आपत्तियों को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है। प्रतिनिधियों का कहना है कि सैटेलाइट इमेज लगातार अपडेट नहीं होतीं। ऐसे में यदि भौतिक निरीक्षण, वैध दस्तावेज और वास्तविक साइट की स्थिति स्पष्ट है तो केवल पुरानी सैटेलाइट इमेज के आधार पर आपत्ति नहीं लगाई जानी चाहिए।


एसोसिएशन ने स्वीकृत भवन मानचित्रों का केंद्रीकृत डाटाबेस बनाने का भी सुझाव दिया है। कई बार आवेदकों से आसपास के किसी पूर्व स्वीकृत भवन मानचित्र की प्रति मांगी जाती है, जबकि नए विकसित क्षेत्रों में ऐसा कोई मानचित्र उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में प्राधिकरण द्वारा डिजिटल डाटाबेस तैयार कर पंजीकृत आर्किटेक्ट, इंजीनियर एवं ड्राफ्ट्समैन को वैध संदर्भ के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।


इसके अलावा तकनीकी आपत्तियों के सीधे एवं समयबद्ध निस्तारण, जेई, एई और सचिव स्तर पर जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण, अनावश्यक स्तरों पर फाइलों की आवाजाही कम करने तथा आवश्यक एनओसी को ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से जारी कराने की मांग की गई है।


एसोसिएशन के अनुसार, भवन मानचित्र जमा करने से पहले प्राधिकरण की ओर से एक मानकीकृत प्री-सबमिशन चेकलिस्ट जारी की जानी चाहिए, जिसमें संबंधित श्रेणी के भवन के लिए आवश्यक दस्तावेज, ड्राइंग, तकनीकी जानकारी, प्रमाण-पत्र और एनओसी की पूरी जानकारी हो। इससे प्रारंभिक स्तर पर ही फाइल पूर्ण रूप से जमा हो सकेगी और बाद में लगने वाली आपत्तियों तथा देरी में कमी आएगी।
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव प्रत्यूष सिंह ने एसोसिएशन द्वारा उठाए गए बिंदुओं को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता, तकनीकी स्पष्टता और समयबद्धता बनाए रखना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन की ओर से प्राप्त सुझावों का नियमानुसार परीक्षण किया जाएगा और जो सुधार संभव होंगे, उन्हें प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में शामिल किया जाएगा।


एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि इन सुझावों पर सकारात्मक कार्रवाई होने से भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी, तकनीकी और समयबद्ध बनेगी तथा आम नागरिकों के साथ-साथ वास्तुविदों, इंजीनियरों और ड्राफ्ट्समैन को भी अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी।


प्रमुख मांगें:
सभी आपत्तियां एक साथ और स्पष्ट रूप से दर्ज हों।
तकनीकी आपत्तियां संबंधित नियम के आधार पर हों।
मामूली जीपीएस कोऑर्डिनेट अंतर के लिए निर्धारित टॉलरेंस हो।
पुरानी सैटेलाइट इमेज के आधार पर अनावश्यक आपत्ति न लगे।
पूर्व स्वीकृत मानचित्रों का डिजिटल डाटाबेस बनाया जाए।
एनओसी प्रक्रिया को ऑनलाइन और समयबद्ध किया जाए।
भवन मानचित्र के लिए प्री-सबमिशन चेकलिस्ट जारी हो।
जेई, एई और सचिव स्तर की जिम्मेदारियां स्पष्ट हों।
तकनीकी आपत्तियों का सीधे और समयबद्ध निस्तारण किया जाए।

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