श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह और महारास की दिव्य रसधारा में सराबोर हुए श्रद्धालु, श्री सतीश पटेल बोले— श्रीमद्भागवत कथा समाज को प्रेम, संस्कार और भक्ति का संदेश देती है



हरिद्वार (कमल शर्मा)। श्री आनन्द धर्मशाला ट्रस्ट, क्षत्रिय कलोता समाज, हरिद्वार में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठे दिन कथा व्यास पं. डॉ. ललित शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह तथा महारास (रासलीला) का अत्यंत भावपूर्ण एवं रसपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति और आनंद से भावविभोर हो उठे। महारास की दिव्य लीलाओं का वर्णन सुनकर पूरा पांडाल “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गुंजायमान हो गया।


कथा व्यास ने कहा कि माता रुक्मिणी की अटूट श्रद्धा, समर्पण और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम प्रत्येक भक्त के लिए आदर्श है। उन्होंने बताया कि महारास केवल एक लीला नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है, जो मनुष्य को प्रेम, भक्ति और आत्मिक शांति का मार्ग दिखाती है।


इस अवसर पर आयोजक श्री सतीश पटेल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, सद्भाव, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का संचार करने का सशक्त माध्यम है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्तव्य, सेवा और मानवता की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए अधिक से अधिक लोगों से कथा श्रवण कर अपने जीवन को धर्ममय और संस्कारवान बनाने का आह्वान किया।


कथा के समापन पर भगवान श्रीकृष्ण की भव्य आरती उतारी गई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में डूबकर कथा का श्रवण किया।

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