त्याग, तपस्या और सेवा के प्रतीक थे ब्रह्मलीन स्वामी अजरानंद, गुरु परंपरा के आदर्शों को आगे बढ़ा रहे स्वामी स्वयंमानंद


हरिद्वार (कमल शर्मा)। सप्तसरोवर रोड स्थित स्वामी अजरानंद महिला आश्रम ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय गुरुजन स्मृति समारोह का समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ। संस्था के परमाध्यक्ष महंत स्वामी स्वयंमानंद महाराज की अध्यक्षता तथा स्वामी विचित्रानंद महाराज के संयोजन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संत समाज और श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन स्वामी अजरानंद महाराज, माता देवी शांतानंद, माता देवी स्वरूपानंद तथा ब्रह्मलीन स्वामी सच्चिदानंद महाराज को पुष्पांजलि अर्पित कर समाधि पूजन किया।
इस अवसर पर स्वामी स्वयंमानंद महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी अजरानंद महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव सेवा और विशेष रूप से दिव्यांग एवं नेत्रहीन बच्चों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनके द्वारा स्थापित स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय इंटर कॉलेज आज हजारों दिव्यांग विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षा और आत्मनिर्भरता का प्रकाश फैला रहा है। उन्होंने कहा कि माता शांतानंद, माता स्वरूपानंद एवं गुरुदेव सच्चिदानंद महाराज ने भी इस सेवा परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया और आज उसी संकल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद महाराज ने कहा कि स्वामी स्वयंमानंद महाराज जिस निष्ठा और समर्पण के साथ अपने गुरुजनों के अधूरे संकल्पों को पूर्ण करने में जुटे हैं, वह संपूर्ण संत समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है। वहीं स्वामी विचित्रानंद महाराज ने कहा कि गुरु ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं और गुरु के प्रति श्रद्धा ही जीवन को सही दिशा प्रदान करती है।
श्रद्धांजलि सभा में स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, महंत सूरज दास, महंत विवेकानंद, महंत गोविंद दास, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी ज्योर्तिमयानंद, महंत दिनेश दास, महंत मोहन सिंह, भक्त दुर्गा दास, स्वामी कृष्णानंद और स्वामी महेशानंद सहित अनेक संत-महात्माओं ने ब्रह्मलीन गुरुजनों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सभा का संचालन महंत रविदेव शास्त्री ने किया, जबकि अंत में स्वामी विचित्रानंद, रमेश कुमार एवं स्वामी अजरानंद महिला आश्रम ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने सभी संतों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
शिक्षा
जिस गुरु परंपरा ने सेवा को साधना और शिक्षा को समाज उत्थान का माध्यम बनाया, उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए स्वामी अजरानंद आश्रम आज भी मानवता, संस्कार और दिव्यांगजनों के उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित होकर समाज में प्रेरणा का प्रकाश फैला रहा है।

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