“अन्नदाता के हक में भाकियू (चढ़ूनी) का बिगुल, सरकार को चेताया- किसानों की अनदेखी पड़ी तो होगा बड़ा आंदोलन”


अन्नदाता के हक में भाकियू (चढ़ूनी) की हुंकार, मांगें नहीं मानीं तो होगा बड़ा आंदोलन
मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन के जिलाध्यक्ष नकुल अहलावत ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील किसानों और आम जनमानस के हितों के खिलाफ है, इसलिए इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि किसानों को डीजल, यूरिया, डीएपी सहित सभी उर्वरक समय पर और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाएं, किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा की सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जाएं। साथ ही आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए सरकार ठोस और प्रभावी कदम उठाए।
नकुल अहलावत ने कहा कि लगातार बढ़ती लागत, घटती आय और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। यदि सरकार ने समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो अन्नदाता को अपने हकों की लड़ाई के लिए बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसान विरोधी नीतियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसानों की आवाज को सड़क से लेकर सदन तक बुलंद किया जाएगा।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख बहादराबाद और राष्ट्रीय सलाहकार प्रियव्रत ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है, इसलिए सरकार को खेती को लाभकारी बनाने और किसानों को राहत देने के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान और समय पर खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवनीत पंवार ने कहा कि किसानों की अनदेखी देश की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकती है। सरकार को किसानों के हितों के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
किसान वेलफेयर फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोमदत्त शर्मा ने कहा कि अन्नदाता की बदहाल स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय है। किसानों को कर्ज के बोझ और बढ़ती लागत से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार को ठोस आर्थिक पैकेज देना चाहिए।
हिसार मोर्चा संघ के अध्यक्ष शहजाद अली ने कहा कि किसान और मजदूर देश की असली ताकत हैं। सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो खेती को घाटे का सौदा बनने से रोकें और युवाओं को कृषि से जोड़ने का काम करें।
किसान मोर्चा क्रांति के अध्यक्ष एडवोकेट अनूप सागर ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासनों से नहीं बल्कि ठोस निर्णयों से होगा। यदि किसानों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष पवन चौहान ने कहा कि किसान की खुशहाली ही देश की खुशहाली है। सरकार को किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
जिला अध्यक्ष इंतजार अहमद ने कहा कि किसान आज कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है, ऐसे समय में सरकार का दायित्व है कि वह किसानों के हितों की रक्षा करते हुए उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करे।
सभी किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि यदि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो देशभर में व्यापक आंदोलन चलाकर सरकार को किसानों की ताकत का एहसास कराया जाएगा। किसानों के सम्मान, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष हर स्तर पर जारी रहेगा।

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