गुरुदेव कृष्णा संजय जी महाराज के पावन सान्निध्य में बेटियों ने माता-पिता की स्मृति में कराया श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ

केदारपुरम, देहरादून में बेटियों के प्रेम और श्रद्धा ने किया सभी को भावुक

देहरादून। बेटियाँ आखिर बेटियाँ होती हैं…
माता-पिता इस संसार में न भी रहें, लेकिन बेटियों के हृदय में उनका प्रेम कभी समाप्त नहीं होता। इसी अटूट प्रेम, श्रद्धा और माता-पिता की पावन स्मृति को समर्पित एक भावपूर्ण दृश्य केदारपुरम, देहरादून में देखने को मिला।

पांथरी परिवार की बेटियों ने अपने दिवंगत माता-पिता की स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराकर उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

जिस आँगन में कभी उनका बचपन बीता, जिस घर से उनकी डोली विदा हुई, आज उसी मायके में लौटकर बेटियों ने भगवान श्रीकृष्ण की कथा का शुभारंभ कराया। माता-पिता भले ही आज साक्षात उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी स्मृतियाँ, उनके संस्कार और उनका आशीर्वाद आज भी बेटियों के हृदय में जीवंत हैं।

परम पूज्य गुरुदेव कृष्णा संजय जी महाराज, पीठाधीश्वर मोहन गोकुलधाम हरिद्वार के पावन सान्निध्य में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के माध्यम से बेटियों ने अपने माता-पिता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके प्रति अपने अटूट प्रेम को भगवान के चरणों में समर्पित किया।

कहते हैं बेटियाँ पराई होती हैं…
लेकिन यह दृश्य उस कहावत को झुठला देता है।

बेटियाँ घर से विदा होती हैं, माता-पिता से नहीं।
समय बीत जाता है, जीवन बदल जाता है, माता-पिता संसार से विदा हो जाते हैं, लेकिन उनके लिए बेटी के हृदय में बसा प्रेम कभी विदा नहीं होता।

माँ नहीं होती तो भी उसकी ममता याद आती है,
पिता नहीं होते तो भी उनका आशीर्वाद महसूस होता है।
मायके का आँगन खाली हो सकता है,
लेकिन बेटी के हृदय में माँ-बाप का घर कभी खाली नहीं होता।

आज पांथरी परिवार की बेटियों ने यह संदेश दिया कि सच्चा प्रेम देह के साथ समाप्त नहीं होता—वह स्मृतियों में, संस्कारों में और श्रद्धा में सदैव जीवित रहता है।

श्रीमद्भागवत कथा के रूप में बेटियों ने अपने माता-पिता की स्मृति को जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण के चरणों से जोड़ा, वह निश्चित रूप से भावुक करने वाला और प्रेरणादायी है।

🙏 ऐसी संस्कारी बेटियों को शत्-शत् नमन।
ईश्वर उनके दिवंगत माता-पिता की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और परिवार पर सदैव अपनी कृपा बनाए रखें।

पांथरी परिवार की सभी बेटियों को इस पावन संकल्प के लिए हार्दिक साधुवाद एवं मंगलकामनाएँ।

🌺 माता-पिता चले जाते हैं…
लेकिन बेटियों के हृदय से कभी नहीं जाते।
उनकी स्मृतियाँ ही फिर जीवनभर बेटी का मायका बनकर साथ चलती हैं। 🙏

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *