हरिद्वार (कमल शर्मा)। तमिलनाडु से पधारे संत-महात्माओं ने परम पूज्य स्वामी राम मुनि जी महाराज से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें धार्मिक पुस्तक भेंट करते हुए सम्मान व्यक्त किया। इस दौरान संतों और महाराज जी के बीच धर्म, संस्कृति तथा सनातन परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई।
बैठक में समाज में आध्यात्मिक चेतना को और अधिक सशक्त बनाने, युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने तथा धार्मिक मूल्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विचार-विमर्श किया गया। संतों ने कहा कि वर्तमान समय में सनातन संस्कृति के आदर्शों और मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे समाज में नैतिकता, सद्भाव और आध्यात्मिकता का वातावरण मजबूत हो सके।
परम पूज्य स्वामी राम मुनि जी महाराज ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का आधार है। उन्होंने संतों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के संतों का एक मंच पर आकर सनातन संस्कृति के उत्थान के लिए चिंतन करना अत्यंत शुभ संकेत है।
इस अवसर पर उपस्थित संतों ने धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए समाज को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक और श्रद्धामय बना रहा।
धर्म और संस्कृति के संरक्षण पर मंथन, तमिलनाडु के संतों ने स्वामी राम मुनि जी महाराज का किया सम्मान










