भारतीय संस्कारों, परंपराओं और युवा पीढ़ी के भविष्य पर हुआ मंथन, भाजपा जिला मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र चौहान ने संस्कृति संरक्षण को बताया महत्वपूर्ण
हरिद्वार (कमल शर्मा)। आर्यनगर, ज्वालापुर स्थित पातंजल योगधाम में 20 सितंबर 2026, रविवार को “जेन-जी और भारतीय संस्कृति” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। परम पूजनीय गुरुदेव डॉ. स्वामी दिव्यानंद सरस्वती जी के आशीर्वाद से आयोजित इस गोष्ठी में भारतीय संस्कृति, संस्कारों, परंपराओं और युवा पीढ़ी के जीवन में उनके महत्व पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, धार्मिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों, राजनेताओं, अधिकारियों, पत्रकारों तथा अन्य गणमान्य लोगों की सहभागिता रही। गोष्ठी का उद्देश्य नई पीढ़ी और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के बीच संवाद को बढ़ावा देना तथा युवाओं के विचारों और दृष्टिकोण को समझना रहा।
भाजपा जिला मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र चौहान ने कहा कि “भारतीय संस्कृति हमारी पहचान, हमारी विरासत और हमारे जीवन के मूल्यों का आधार है। जेन-जी यानी युवा पीढ़ी देश का भविष्य है। ऐसे में युवाओं को अपनी संस्कृति, संस्कारों, गौरवशाली परंपराओं और नैतिक मूल्यों से परिचित कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिकता और तकनीक के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना भी आवश्यक है। पातंजल योगधाम में ‘जेन-जी और भारतीय संस्कृति’ जैसे विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन समाज में सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने वाला प्रयास है। इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी विरासत को समझने और उसके महत्व पर विचार करने का अवसर प्रदान करते हैं।”
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की विशेषता उसकी समृद्ध परंपराओं, आध्यात्मिक चेतना, सहिष्णुता और मानव कल्याण की भावना में निहित है। युवा पीढ़ी इन मूल्यों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पातंजल योगधाम के अध्यक्ष स्वामी मेघानंद सरस्वती जी के नेतृत्व में आयोजित इस गोष्ठी में वक्ताओं ने जेन-जी की बदलती सोच, आधुनिक जीवनशैली और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में संवाद और विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम से संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
पातंजल योगधाम, आर्यनगर-1, एसबीआई एवं बीओबी बैंक के सामने, ज्वालापुर, हरिद्वार में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय संस्कृति और युवा पीढ़ी के संबंधों पर सार्थक चर्चा की गई













