हरिद्वार (कमल शर्मा)। भीमगोड़ा स्थित श्री कृपा धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह के छठे दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत लीलाओं के रस में सराबोर हो गए। कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की मथुरा लीला, अत्याचारी कंस के वध तथा भक्तों के प्रिय प्रसंग श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का अत्यंत भावपूर्ण और रोचक वर्णन किया।
कथा के दौरान बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए कंस का संहार कर मथुरा को अत्याचार से मुक्त कराया। इसके पश्चात रुक्मिणी जी के अनन्य प्रेम, समर्पण और भक्ति का वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण द्वारा उनका हरण कर विवाह करने की दिव्य कथा सुनाई गई। कथा के मधुर प्रसंगों और भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे तथा पूरे परिसर में जय श्रीकृष्ण के जयघोष गूंजते रहे।
कथा व्यास ने कहा कि रुक्मिणी विवाह केवल एक वैवाहिक प्रसंग नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान का स्मरण करता है, भगवान स्वयं उसके जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
सायंकाल आयोजित विशेष सत्संग में गीता मनीषी पूज्य श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता के महत्वपूर्ण सूत्रों का सरल एवं व्यावहारिक विवेचन किया। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है। गीता के उपदेश व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा का मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे गीता के संदेशों को अपने दैनिक जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाएं। कार्यक्रम के अंत में आरती, भजन-कीर्तन एवं प्रसाद वितरण किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा एवं सत्संग का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
रुक्मिणी हरण से गूंजा कृपा धाम, कंस वध और मथुरा लीला के दिव्य प्रसंगों ने भक्तों को किया भाव-विभोर




