हरिद्वार। कनखल स्थित संन्यास रोड के एक आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास पीठ पर विराजमान महाराज श्री श्री _ जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं, माखन चोरी, कालिया नाग दमन, गोवर्धन पूजा तथा महारास की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को प्रेम, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। महाराज श्री श्री जी ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करते हैं।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के अभिमान को तोड़ने हेतु गोवर्धन पर्वत धारण करने की लीला का सुंदर वर्णन किया गया। इस प्रसंग को सुन श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब गए और पूरा पंडाल “राधे-राधे” तथा “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को संस्कार, संयम और भक्ति का संदेश देती है। कथा श्रवण से मन की शुद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मुख्य यजमान __ परिवार ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन समाज में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने का कार्य हो रहा है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भजन-कीर्तन के साथ भक्तिमय वातावरण बना रहा।
श्रीकृष्ण बाल लीलाओं और गोवर्धन महिमा से भावविभोर हुए श्रद्धालु




