ध्रुव की अटल भक्ति और भगवान के दिव्य अवतारों का हुआ भावपूर्ण वर्णन, कथा श्रवण से भक्त हुए भावविभोर
हरिद्वार। श्री आनन्द धर्मशाला ट्रस्ट, क्षत्रिय कलोता समाज, हरिद्वार में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा अमृत का रसास्वादन किया। व्यासपीठ से कथावाचक पं. डॉ. ललित शास्त्री ने भगवान के दिव्य अवतारों एवं भक्तों की प्रेरणादायी कथाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया।

कथा के दौरान भगवान श्री वराह अवतार का प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि जब पृथ्वी पाताल में चली गई थी, तब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर उसका उद्धार किया और धर्म की पुनः स्थापना की। इसके बाद भगवान कपिल मुनि द्वारा माता देवहूति को दिए गए सांख्य योग एवं आत्मज्ञान के उपदेशों का विस्तार से वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का कल्याण भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के समन्वय से ही संभव है।

आगे सती चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया गया कि अहंकार और अपमान का परिणाम सदैव विनाशकारी होता है तथा भगवान शिव और माता सती के जीवन से त्याग, सम्मान और मर्यादा की प्रेरणा मिलती है। कथा के अंत में बाल भक्त ध्रुव की अटूट भक्ति का प्रसंग सुनाया गया। पं. डॉ. ललित शास्त्री ने कहा कि सच्ची श्रद्धा और दृढ़ संकल्प से भगवान स्वयं भक्त पर कृपा बरसाते हैं। ध्रुव की तपस्या और भगवान विष्णु के साक्षात दर्शन की कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल “जय श्री कृष्ण” तथा “हरि बोल” के जयघोष से गूंज उठा।

इस अवसर पर आयोजक श्री सतीश पटेल एवं श्री विशाल पटेल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, सेवा और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से कथा का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा अपने परिवार सहित नियमित रूप से कथा श्रवण करने का आग्रह किया।

कथा में कुं. पृथ्वी पटेल, कुं. रुद्रवीर पटेल सहित समस्त पटेल मोरी परिवार, बड़ा बांगड़दा (इन्दौर) ने श्रद्धालुओं का स्वागत कर सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन, पुष्प वर्षा और भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी झांकियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।





