कमाल शर्मा (हरिहर समाचार)
कमल शर्मा (हरिहर समाचार)
हरिद्वार। गोविंद घाट पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा व्यास श्री भक्ति वेदांत सिद्धांति महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही ज्ञान और भक्ति की गंगा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा पंडाल में भजनों और जयकारों के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण करते नजर आए।

कथा के दौरान महाराज श्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के सातवें (अंतिम) दिन की कथा अत्यंत भावुक और ज्ञानवर्धक होती है, जिसमें मुख्य रूप से सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष और भागवत महात्म्य का वर्णन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र सच्ची मित्रता और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है। सुदामा का संकोच, पत्नी के आग्रह पर चावल लेकर द्वारिका जाना, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा के चरण धोना और बिना मांगे ही उनकी दरिद्रता दूर कर देना—यह प्रसंग भक्तों को भावविभोर कर देता है और यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति और मित्रता का फल अवश्य मिलता है।

वहीं परीक्षित मोक्ष के प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने बताया कि शुकदेव मुनि राजा परीक्षित को आत्मा की अमरता का ज्ञान देते हैं। जब तक्षक नाग उन्हें डसने आता है तो राजा परीक्षित निर्भय होकर भगवान के ध्यान में लीन हो जाते हैं। तक्षक के दंश के बाद उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि भगवान की शरण में जाने पर मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और आत्मा को परम शांति प्राप्त होती है।

कथा के दौरान रुक्मणी विवाह का भी अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण चित्रण प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के अंत में भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए बताया गया कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से जीव जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर भगवान की कृपा का पात्र बनता है।

इस अवसर पर कथा के आयोजकों होटल प्राइड एलीट परिवार के अशोक गोगिया, राजेंद्र गोगिया, सुमित सचदेवा और सुरेंद्र बंसल ने कहा कि गोविंद घाट की पावन भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि कथा के माध्यम से समाज में धर्म, संस्कार और भक्ति का संदेश फैल रहा है तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का लाभ उठा रहे हैं।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं। कथा के समापन अवसर पर फूलों की होली का भरपूर आनंद लिया गया श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ कथा का आनंद लिया और पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा की भावना छा गई l मां गंगा को वस्त्र आदि भेंट कर हुई गंगा आरती सभी ने मां गंगा से लिया आशीर्वाद l
