विशाल आर्य जिला सम्मेलन एवं वैदिक सत्संग उत्सव श्रद्धा, वैदिक मंत्रोच्चार और राष्ट्रभक्ति के संदेशों के बीच भव्य रूप से हुआ सम्पन्न



हरिद्वार(कमल शर्मा)लक्सर रोड स्थित रूबराज पैलेस में अमर शहीद भगत सिंह के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित षष्टम् विशाल आर्य जिला सम्मेलन एवं वैदिक सत्संग उत्सव रविवार को श्रद्धा, वैदिक मंत्रोच्चार और राष्ट्रभक्ति के संदेशों के बीच भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में बड़ी संख्या में आर्य समाज से जुड़े लोगों, धर्मप्रेमी नागरिकों, विद्वानों, समाजसेवियों और क्षेत्रवासियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक यज्ञ एवं ओ३म् ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके पश्चात वैदिक प्रवचन, भजनोपदेश, भोजन प्रसाद तथा विभिन्न आध्यात्मिक एवं सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। आर्यवीर दल के ब्रह्मचारियों ने शारीरिक प्रदर्शन के माध्यम से अनुशासन, शौर्य और आत्मबल का संदेश दिया।
सम्मेलन में वैदिक जगत के विद्वानों एवं संतों ने भारतीय संस्कृति, वेदों के संदेश, राष्ट्र निर्माण, संस्कार और युवा पीढ़ी की भूमिका पर विचार रखे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
जिला आर्य प्रतिनिधि सभा हरिद्वार के प्रधान हरपाल सिंह सैनी ने कहा कि आर्य समाज का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार, सेवा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रहित की भावना को मजबूत करना भी है। उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह जैसे राष्ट्रनायकों की स्मृति युवाओं में देशप्रेम और जिम्मेदारी की भावना जगाने का माध्यम है। उन्होंने सम्मेलन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रवासियों का आभार जताया।
नीरज सैनी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि युवाओं में अनुशासन, संस्कार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। आर्यवीर दल के प्रदर्शन ने भी युवाओं में उत्साह का संचार किया।
वहीं दिव्य प्रकाश आर्य ने कहा कि वेदों का संदेश मानव कल्याण, सत्य, सदाचार और सामाजिक एकता का संदेश है। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के आयोजनों का उद्देश्य समाज को अंधविश्वास से दूर करते हुए शिक्षा, संस्कार और विवेकपूर्ण जीवन की ओर प्रेरित करना है। उन्होंने सम्मेलन में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन में स्वामी यज्ञमुनि सरस्वती, स्वामी रूपेंद्र महाराज, स्वामी सत्यवेश जी, डॉ. करुणा आर्या, आचार्य धनंजय, आचार्य संदीप वेदालंकार, आचार्य दिव्य प्रकाश, आचार्य सुनील शास्त्री, घनश्याम प्रेमी, चेतराम आर्य एवं मोहर सिंह आर्य सहित अनेक विद्वानों एवं भजनोपदेशकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक आचार्य बालकृष्ण एवं स्वामी यतीश्वरानन्द रहे। सम्मेलन में आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तराखंड तथा जिला आर्य प्रतिनिधि सभा हरिद्वार से जुड़े पदाधिकारियों, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारियों, समाजसेवियों एवं क्षेत्रीय गणमान्य नागरिकों का भी सम्मान किया गया।
इस अवसर पर ऋषिपाल आर्य, योगेंद्र चौहान, डॉ. संजिल आर्य, अनिल चौधरी, निर्दोष आर्य, अजय आर्य, पवन आर्य, ओमपाल आर्य, डॉ. मीनू सैनी, अमन ब्रह्मचारी, कंवरपाल आर्य, राजेश राठौर, धर्मसिंह आर्य, डॉ. सुशील आर्य, एडवोकेट जितेंद्र सैनी सहित जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन के माध्यम से वैदिक संस्कृति, सामाजिक समरसता, संस्कार और राष्ट्र सेवा का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। समापन अवसर पर आयोजक मंडल ने सभी अतिथियों, विद्वानों, सहयोगियों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया तथा राष्ट्रहित और समाजसेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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