हरिद्वार(कमल शर्मा)संदेश नगर स्थित श्री परमधाम आश्रम में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान की असीम कृपा से आयोजित दिव्य एवं भव्य श्रीराम कथा का श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर आयोजित विशाल संत समागम में देशभर से पधारे संत-महात्माओं तथा हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर प्रभु श्रीराम के आदर्शों और संतों के अमृतमय उपदेशों का लाभ प्राप्त किया। संपूर्ण आश्रम परिसर ‘जय श्रीराम’ और हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि ज्ञान, वैराग्य और भक्ति मानव जीवन की तीन दिव्य शक्तियां हैं, जिनके समन्वय से जीवन सफल और सार्थक बनता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र सत्य, मर्यादा, त्याग और धर्म का सर्वोच्च आदर्श है। श्रद्धा और विश्वास के साथ रामकथा का श्रवण करने से मनुष्य के अंतःकरण के विकार दूर होते हैं तथा जीवन में शांति, सदाचार और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव जागृत होता है। उन्होंने संतों के सान्निध्य को जीवन को दिशा देने वाला दिव्य प्रकाश बताया।
महामंडलेश्वर आचार्य ललितानंद महाराज ने कहा कि रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का दिव्य माध्यम है। भगवान श्रीराम का जीवन धर्म, करुणा, सेवा, क्षमा और कर्तव्यपालन की अनुपम शिक्षा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सत्संग, स्वाध्याय, सेवा और प्रभु नाम-स्मरण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यही कलियुग में मोक्ष का सबसे सरल मार्ग है।
परम पूज्य महामंडलेश्वर निर्भयानंद पुरी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि संसार की समस्त अशांति का समाधान केवल ईश्वर भक्ति और गुरु कृपा में निहित है। उन्होंने कहा कि गुरु का सान्निध्य मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर आत्मज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। संत समाज सदैव मानवता, सद्भाव, प्रेम और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित रहा है तथा समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है।
संत समागम के दौरान संत-महात्माओं ने श्रीराम नाम संकीर्तन, सत्संग एवं धर्मोपदेश के माध्यम से श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के संरक्षण, नैतिक जीवन, सेवा, परोपकार और राष्ट्रहित के लिए प्रेरित किया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की आरती कर विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि एवं समस्त मानवता के कल्याण की मंगलकामना की।
इस अवसर पर स्वामी नित्यानंद पुरी महाराज एवं श्री भागवत पांडे ने भी अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। अंत में संतों का पूजन-अभिनंदन, प्रसाद वितरण तथा भक्ति-भाव से ओतप्रोत वातावरण में कार्यक्रम का गरिमामय समापन हुआ।










