कलम की दहाड़ (रक्षाबंधन)
रक्षाबंधन का हमें,
करना है त्यौहार।
बाबा जी ने कर दिया,
चीनी पैंसठ पार।।
महँगाई का तोहफा,
करना है स्वीकार।
बाबा को दुश्मन लगें,
हिंदू के त्यौहार।।
नमक घाव पर मल दिया,
बाबा ने इस बार।
हम जाएंगे भूल अब,
चीनी की चमकार।।
करवा देना गाँव में,
चीनी का छिड़काव।
इसी सहारे जीतना,
होगा सरल चुनाव।।
अब मत मुर्गा बाँटना,
चीनी देना बाँट।
पाँच साल के बन पुनः,
जाना तुम प्रधान( सम्राट)।।
पकने हैं चीनी बिना,
अब घर में पकवान।
पर मालिक मत भेजना,
घर में अब मेहमान।।
देना होगा अतिथि को,
नमक चटाकर नीर।
बिक जाएगी अन्यथा,
पुरखों की जागीर।।
अगर अतिथि ने रख दिया,
अब शरबत की माँग।
गंगा में गंगा कसम,
होगी शीघ्र छलाँग।।
आगे से इस बात का,
रखना होगा ध्यान।
चीनी का सबसे अधिक,
उत्तम होता दान।।
कलम की दहाड़
डा.ओ पी शर्मा बबलूपंडित













