श्रीमद्भागवत महापुराण कथा एवं ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालु आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति रस की अविरल धारा में हुए सराबोर


कपिल गीता, ध्रुव भक्ति और जड़ भरत के वैराग्य प्रसंगों से गूंजा भागवत कथा पंडाल, श्रद्धालु हुए भावविभोर

हरिद्वार (कमल शर्मा)। भूपतवाला स्थित बाबा बंशी वाले अन्नपूर्णा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा एवं ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालु आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति रस की अविरल धारा में सराबोर हो गए। कथा व्यास आचार्य श्री मिथिलेश नंदन कौशिक जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के अत्यंत प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए मानव जीवन के कल्याण का मार्ग बताया।
कथा के दौरान आचार्य श्री ने भगवान कपिल मुनि द्वारा माता देवहूति को दिए गए दिव्य ज्ञान एवं कपिल गीता का वर्णन करते हुए बताया कि आत्मज्ञान, वैराग्य और भक्ति के माध्यम से मनुष्य जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने कहा कि भगवान कपिल का उपदेश आज भी मानव समाज के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था।
इसके पश्चात ध्रुव चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया गया कि दृढ़ संकल्प, अटूट श्रद्धा और भगवान के प्रति समर्पण से एक बालक भी ध्रुव पद प्राप्त कर सकता है। ध्रुव की तपस्या और भगवान विष्णु की कृपा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा में जड़ भरत के वैराग्य, आत्मचिंतन और मोक्ष मार्ग का भी सुंदर वर्णन किया गया। आचार्य श्री ने कहा कि सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर ही मनुष्य सच्चे आनंद और ईश्वर की प्राप्ति कर सकता है।
साथ ही भक्त प्रह्लाद के अद्भुत चरित्र एवं भगवान नरसिंह अवतार की कथा का शुभारंभ भी हुआ। आचार्य श्री ने बताया कि सच्चे भक्त की रक्षा के लिए भगवान स्वयं अवतार धारण करते हैं। प्रह्लाद की अटूट भक्ति और भगवान नरसिंह के प्राकट्य का प्रसंग सुन श्रद्धालुओं ने “नरसिंह भगवान की जय” के उद्घोष से कथा पंडाल को गुंजायमान कर दिया।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन, जयघोष और भक्तिमय वातावरण ने पूरे आश्रम परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा आयोजन की सफलता के लिए आयोजक मित्तल परिवार की सराहना की।
आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन पूजा, रुक्मणी मंगल तथा हवन-यज्ञ एवं विशाल भंडारे के कार्यक्रम श्रद्धापूर्वक संपन्न होंगे।

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