गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी पर योग-प्रकृति चिकित्सा का संदेश, संतों के सान्निध्य में जनजागरण अभियान संपन्न


हरिद्वार (कमल शर्मा)। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से गुजरात के बड़ौदा निवासी डॉ. जितेंद्र बी. प्रजापति (बीएमएस, एनडीडीवाई) द्वारा 21 जून से 25 जून तक हरिद्वार, ऋषिकेश एवं रुड़की क्षेत्र में विशेष जनजागरण अभियान चलाया गया। इस दौरान गंगा दशहरा एवं निर्जला एकादशी जैसे पावन पर्वों पर संत-महात्माओं के सान्निध्य में योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक जीवनशैली को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
अभियान के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं को योग, प्राणायाम, प्राकृतिक चिकित्सा तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। संतों एवं धर्माचार्यों ने भी स्वास्थ्य और अध्यात्म के समन्वय को समय की आवश्यकता बताते हुए इस पहल की सराहना की।


महंत श्री भक्ति हृदयेशरण महाराज ने कहा कि “योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का भी श्रेष्ठ साधन है। भारतीय संस्कृति में योग और अध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हैं। समाज को स्वस्थ और संस्कारित बनाने के लिए योग को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।”
महंत श्री नारायण शरण जी महाराज ने कहा कि “प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर अनेक रोगों से बचा जा सकता है। योग, संयमित आहार और सकारात्मक विचार मानव जीवन को संतुलित एवं सुखमय बनाते हैं। ऐसे जनजागरण अभियान समाज के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।”
महंत श्री मुरारी शरण जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि “सनातन संस्कृति में शरीर को ईश्वर का मंदिर माना गया है। उसकी रक्षा और संवर्धन के लिए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का अनुसरण करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। स्वास्थ्य और अध्यात्म का संगम ही जीवन की वास्तविक सफलता है।”
इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र बी. प्रजापति ने कहा कि “योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा भारत की अमूल्य धरोहर हैं। मेरा उद्देश्य देशभर में लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। हरिद्वार की आध्यात्मिक भूमि पर संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर यह अभियान और अधिक प्रेरणादायी बन गया है। आने वाले समय में भी स्वास्थ्य जागरूकता के ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।”
उन्होंने बताया कि योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से बिना दुष्प्रभाव के स्वास्थ्य संवर्धन संभव है तथा आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, योग साधकों एवं स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता कर स्वस्थ जीवन, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाने का संकल्प लिया।

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