डीपीएस दौलतपुर में स्पिक मैके कार्यक्रम का हुआ आयोजन

दिल्ली पब्लिक स्कूल, दौलतपुर, हरिद्वार में स्पिक मैके (SPIC MACAY) हेरिटेज क्लब के तत्वावधान में भारतीय लोक संस्कृति एवं पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पुरुलिया छऊ नृत्य की एक भव्य एवं मनमोहक प्रस्तुति का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य कलाकार पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के प्रसिद्ध छऊ नृत्य कलाकार श्री तारापदा राजक जी एवं उनकी 15 से अधिक कलाकारों की टीम रही।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्यालय में गणमान्य अतिथियों(राम मिलन-प्रिंसिपल राजकीय इंटर कॉलेज दौलतपुर, बी.पी उपाध्याय-वाइस प्रिंसिपल एंजल’ एकेडमी) विद्यालय के प्रो वाइस चेयरमैन श्री विकास गोयल जी और विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती पूनम श्रीवास्तव उपस्थित रहें। साथ ही शुभम शर्मा और संदीप चंदेल, आईआईटी रुड़की के समन्वयकों का पूर्ण सहयोग रहा। एंजेल अकादमी और राजकीय इंटर कॉलेज दौलतपुर के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और पारंपरिक नृत्य शैलियों से परिचित कराना था।
पुरुलिया छऊ नृत्य पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में प्रचलित एक प्रसिद्ध लोक नृत्य शैली है। इसमें विशाल एवं रंग-बिरंगे मुखौटों, ऊर्जावान शारीरिक मुद्राओं, आकर्षक वेशभूषा तथा ध्वनियों के माध्यम से पौराणिक कथाओं और वीर गाथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
श्री तारापदा राजक जी ने अपनी अद्भुत कला के माध्यम से महिषासुरमर्दिनी प्रसंग का प्रभावशाली मंचन किया। उनकी सशक्त भाव-भंगिमाओं, ऊर्जावान नृत्य और कलाकारों के उत्कृष्ट तालमेल ने छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बिना संवादों के केवल शारीरिक मुद्राओं और नृत्य के माध्यम से कथाओं को जीवंत करना इस कला की विशेषता रही।
इस प्रस्तुति का समापन एक मनमोहक दृश्य के साथ हुआ, जब छऊ नर्तकों ने एक सुंदर दुर्गा पूजा पंडाल का मंचन प्रस्तुत किया, जिसमें देवी दुर्गा, महिषासुर और अन्य पात्रों को दर्शाया गया था। इस अद्भुत प्रस्तुति ने छात्रों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया, वे कलात्मक प्रतिभा, जीवंत भावों और सांस्कृतिक भव्यता से मोहित हो गए। इसके उपरांत विद्यालय परिवार ने श्री तारापदा राजक जी एवं उनकी पूरी टीम के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए भारतीय लोक संस्कृति, परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्ति को समझने का एक अनूठा अवसर सिद्ध हुआ। इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान, जिज्ञासा और गौरव की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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