आचार्य प्रेमनारायण तिवारी ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य का किया वर्णन, संतों के सानिध्य में हुआ हवन एवं संत पंगत
हरिद्वार (कमल शर्मा)। हरिपुर कलां स्थित श्री अन्नपूर्णा मंदिर, प्रेम विहार चौक में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का शनिवार को धार्मिक उल्लास एवं श्रद्धाभाव के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की। इसके उपरांत संतों की पंगत आयोजित की गई, जिसमें संत-महात्माओं का सम्मान करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

अमेरिका निवासी श्री विजय मेहरा, श्री अपूर्व नेहरा एवं समस्त परिवार के सौजन्य से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में कथा व्यास आचार्य श्री प्रेमनारायण तिवारी ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और सदाचार का संदेश दिया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं एवं भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

आचार्य श्री प्रेमनारायण तिवारी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक श्रवण का माध्यम नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य प्रेरणा है। भागवत कथा मनुष्य को सत्य, प्रेम, करुणा, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर व्यक्ति अपने परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा और निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही जीवन को सार्थक बनाती है।

विश्वात्मानंद जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा में श्रीमद्भागवत कथा का विशेष महत्व है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कारों और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। संतों का सानिध्य और सत्संग मनुष्य के विचारों को शुद्ध कर उसे धर्म एवं सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे कथा से प्राप्त शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा भाईचारे को मजबूत करें।

कथा के समापन अवसर पर हवन-यज्ञ में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से आहुतियां अर्पित कीं। इसके पश्चात संतों की पंगत के माध्यम से सेवा एवं समर्पण की परंपरा का निर्वहन किया गया। आयोजन में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और श्रीमद्भागवत कथा के सफल आयोजन पर आयोजक परिवार के प्रयासों की सराहना की।
इस सात दिवसीय धार्मिक आयोजन ने हरिपुर कलां के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का समापन श्रद्धा, भक्ति और संतों के आशीर्वाद के साथ हुआ।













