कृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु, जयकारों से गूंजा भगवान धाम कवीर आश्रम
हरिद्वार (कमल शर्मा)। पितृ पक्ष के पावन अवसर पर स्वर्गीय श्री शान्ती स्वरूप अग्रवाल, स्वर्गीय श्रीमती शान्ती देवी अग्रवाल एवं स्वर्गीय श्री विशन स्वरूप गर्ग की स्मृति में श्री भगवान धाम कवीर आश्रम, भूपतवाला में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस कथा स्थल भक्तिरस से सराबोर हो गया। कथा व्यास आचार्य राघव जी महाराज ब्रजधाम वालों ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया।
कथा के दौरान गजेन्द्र मोक्ष, वामन अवतार, कच्छप अवतार, श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्म एवं नंद महोत्सव जैसे मनोहारी प्रसंगों का वर्णन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही कथा पंडाल में उत्साह की लहर दौड़ गई। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और नंद महोत्सव के दौरान वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया।
कथा व्यास आचार्य राघव जी महाराज ने कहा कि भगवान के अवतार का उद्देश्य धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश करना है। उन्होंने कहा कि “जब-जब संसार में धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतरित होकर भक्तों की रक्षा करते हैं। श्रीकृष्ण जन्म का संदेश है कि मनुष्य अपने जीवन में सत्य, प्रेम, करुणा और धर्म को अपनाए।” उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से कथा श्रवण कर अपने जीवन को संस्कार एवं भक्ति से जोड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर शैलेंद्र अग्रवाल ने कहा कि पितृ पक्ष में पितरों की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने कहा कि “भागवत कथा मनुष्य को अपने संस्कारों और सनातन संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हमें यह संदेश देता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। कथा श्रवण से मन को शांति और जीवन को नई सकारात्मक दिशा मिलती है।”
कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ आनंद मनाया और एक-दूसरे को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की बधाई दी। कथा स्थल पर पूरा वातावरण ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस गजेन्द्र मोक्ष से लेकर नंद महोत्सव तक भक्तिरस में डूबा माहौल













