हरिद्वार, भूपतवाला स्थित अनुभवी आश्रम में दिव्य संत समागम का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ किया गया। समागम में हरिद्वार के अनेक संत-महापुरुषों ने पधारकर धर्म, अध्यात्म और सेवा का संदेश दिया। संतों के आगमन से आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
कार्यक्रम के दौरान संत-महापुरुषों ने अपने आशीर्वचन से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने तथा मानव सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने का संदेश दिया। इसके उपरांत संतों एवं भक्तों के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई तथा संत-महापुरुषों को श्रद्धापूर्वक दक्षिणा अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
इस अवसर पर अनुभवी आश्रम के परमाध्यक्ष महाराज जी ने कहा कि संत समागम भारतीय सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर है। संतों का सानिध्य मनुष्य के जीवन को नई दिशा देता है और समाज में सेवा, संस्कार तथा सद्भाव की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि संत-महापुरुषों के आशीर्वचन और उनके बताए मार्ग पर चलना ही मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता है।
उन्होंने कहा कि अनुभवी आश्रम का उद्देश्य संत सेवा, धर्म प्रचार और समाज में आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना है। संतों का सम्मान और सेवा हमारी सनातन संस्कृति की परंपरा रही है और इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है।
महाराज जी के अनन्य शिष्य योगेश ने कहा कि संतों की सेवा और उनके चरणों में बैठकर आशीर्वाद प्राप्त करना सौभाग्य की बात है। संत समागम जैसे आयोजन समाज को धर्म और संस्कार से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि संतों के सानिध्य से मनुष्य को जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
वहीं कैथल से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी संत समागम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। भक्तों ने कहा कि हरिद्वार की पावन धरती पर संत-महापुरुषों का सानिध्य प्राप्त होना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है। उन्होंने अनुभवी आश्रम की ओर से आयोजित संत सेवा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक वातावरण को मजबूत करते हैं।
समागम के समापन पर संत-महापुरुषों का सम्मान किया गया और सभी श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर प्रसाद ग्रहण किया।
हरिद्वार में अनुभवी आश्रम का भव्य संत समागम, संत-महापुरुषों के आशीर्वचनों से गूंजा वातावरण













