हरिद्वार(कमल शर्मा)। हरिपुर कला स्थित श्री चित्रकूट धाम में सद्गुरुदेव की तृतीय पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और सेवा भावना के साथ संपन्न हुआ। 10 सितंबर से प्रारंभ हुए श्रीरामचरितमानस पाठ का 12 सितंबर को विधिवत समापन पूर्णाहुति एवं विशाल संत भंडारे के साथ हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे करीब सौ से अधिक संत-महात्माओं ने सहभागिता कर सत्संग एवं प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और गुरु भक्ति का संदेश दिया।

इस अवसर पर आश्रम के परमाध्यक्ष महंत श्री परमेश्वरदास जी महाराज ने कहा कि “गुरु केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा और चेतना हैं। गुरुदेव के बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। रामचरितमानस हमें मर्यादा, सेवा, त्याग और सदाचार का संदेश देती है, जिसे अपने जीवन में उतारकर ही समाज और राष्ट्र का कल्याण किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धर्म, संस्कृति और सनातन संस्कारों के संरक्षण के लिए संत समाज और श्रद्धालुओं को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है। गुरु की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाना और सेवा कार्यों को आगे बढ़ाना ही गुरुदेव की स्मृति को जीवंत रखने का श्रेष्ठ माध्यम है।

तृतीय पुण्यतिथि के अवसर पर प्रातःकाल से ही आश्रम में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद रामचरितमानस पाठ की पूर्णाहुति की गई। इसके पश्चात आयोजित विशाल संत भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। विभिन्न आश्रमों से आए संत-महात्माओं, महामंडलेश्वरों, मंडलेश्वरों एवं धर्माचार्यों ने भी कार्यक्रम में उपस्थित होकर सद्गुरुदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की।

आयोजन के दौरान जरूरतमंद लोगों को वस्त्र एवं कंबल का वितरण भी किया गया। इस सेवा कार्य से कार्यक्रम का धार्मिक स्वरूप मानव सेवा के संकल्प से भी जुड़ा नजर आया।
कार्यक्रम के व्यवस्थापक कमल पटेल ने बताया कि पूज्य गुरुदेव की स्मृति में प्रत्येक वर्ष श्रद्धा और सेवा भाव के साथ पुण्यतिथि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस आयोजन का उद्देश्य गुरु की शिक्षाओं को आगे बढ़ाना, सनातन संस्कृति के प्रति लोगों को जागरूक करना और जरूरतमंदों की सेवा करना है।
कार्यक्रम में आए वरिष्ठ समाजसेवी श्री जगदीश लाल पाहवा ने इस आयोजन पर बोलते हुए कहा कि इस संत सम्मेलन ने क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण को भक्तिमय बना दिया। संतों के प्रवचन, रामचरितमानस पाठ और विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।













