हरिद्वार(कमल शर्मा)गंगा एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित मार्ग के विरोध में रविवार को रामलीला भवन में हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न गांवों के किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में रानीमाजरा, जमालपुर कला, किशनपुर, गाजीवाली, बहादरपुर जट सहित कई गांवों के बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। किसानों ने एक स्वर में प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेस-वे का विरोध करते हुए स्पष्ट घोषणा की कि वे अपनी पूर्ण सिंचित एवं उपजाऊ कृषि भूमि किसी भी स्थिति में परियोजना के लिए नहीं देंगे।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गंगा एक्सप्रेस-वे का मार्ग किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि को छोड़कर किसी अन्य स्थान से निकाला जाए। किसानों का कहना है कि उनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है और कृषि भूमि ही उनके परिवारों के पालन-पोषण का एकमात्र आधार है।
संघर्ष समिति के संयोजक कल्याण सिंह चौधरी ने कहा कि “हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों के अस्तित्व की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार को ऐसा विकल्प तलाशना चाहिए जिससे किसानों की उपजाऊ भूमि सुरक्षित रहे। यदि हमारी मांगों की अनदेखी हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।”
संघर्ष समिति के सदस्य प्रमिल चौधरी ने कहा कि “गांव-गांव के किसान अब एकजुट हो चुके हैं। अपनी जमीन और रोजी-रोटी बचाने के लिए हम लोकतांत्रिक तरीके से हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। किसी भी किसान की भूमि जबरन अधिग्रहित नहीं होने देंगे।”
बैठक में किसानों के बेहतर समन्वय और आंदोलन को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए ‘गंगा एक्सप्रेस-वे विरोध संघर्ष समिति’ का गठन भी किया गया। समिति में कल्याण सिंह चौधरी, प्रमिल चौधरी, नफीस अहमद, विक्रम सिंह, परवेश, महक सिंह, पृथ्वीपाल तथा पवन सैनी सहित कई किसानों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
बैठक के अंत में किसानों ने एकजुट होकर सरकार से मांग की कि गंगा एक्सप्रेस-वे की प्रस्तावित योजना में संशोधन कर उपजाऊ कृषि भूमि को बचाया जाए, अन्यथा क्षेत्र के किसान चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।
गंगा एक्सप्रेस-वे के विरोध में किसानों का बिगुल, बोले– “उपजाऊ जमीन पर किसी कीमत पर नहीं बनने देंगे एक्सप्रेस-वे”










